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मेरा स्कूल पर निबंध (My School Essay in Hindi)

मेरा स्कूल

विद्यालय अर्थात विद्या का आलय या घर, मतलब वो स्थान जहां विद्या उपार्जन होता हो। हमारे संस्कारों में विद्या को देवी का स्थान दिया गया है और विद्यालय को ‘मंदिर’ की उपमा दी गयी है। मेरा विद्यालय एक ऐसा विषय है, जिस पर अक्सर निबंध आदि लिखने को दिया जाता रहता है। हमारी जिन्दगी का सबसे अहम समय हम अपने विद्यालय में ही बिताते है। विद्यालय से हमारी ढ़ेरो यादे जुड़ी रहती है। इसलिए विद्यालय सबकी जिन्दगी में बहुत मायने रखता है।

मेरा विद्यालय पर छोटे – बड़े निबंध (Short and Long Essay on My School in Hindi, Mera Vidyalaya par Nibandh Hindi mein)

मेरा विद्यालय पर निबंध – 1 (250 – 300 शब्द).

मेरा विद्यालय एक आदर्श विद्यालय है। मेरे विद्यालय में पठन पाठन उच्च स्तर का है। मेरे विद्यालय में शिक्षा के महत्त्व को समझते हुए, विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करते है। मेरा विद्यालय सारी सुविधाओं से लैस है।

मेरे विद्यालय का स्थान

मेरे विद्यालय का नाम बाल निकेतन है। यह शहर की भीड़-भाड़ से दूर, बेहद शांत माहौल में विद्यमान है। इसके चारों ओर हरियाली ही हरियाली है। जिस कारण वातावरण शुध्द रहता है और हमें शुध्द वायु भी मिलती है। मेरा विद्यालय मेरे घर से थोड़ी ही दूरी पर है। मेरे विद्यालय का व्यास बहुत बड़ा है। इसके चारों तरफ सुंदर-सुंदर फूलों की क्यारियां लगी है।

पठन पाठन का तरीका

हमारे विद्यालय का परिणाम (रिजल्ट) प्रति वर्ष शत-प्रतिशत आता है। मेरे विद्यालय की गणना शहर के अच्छे स्कूलों में की जाती है। मेरे विद्यालय में हर वर्ष वार्षिकोत्सव होता है, जिसमें कई प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम कराये जाते हैं। जिसमें हर प्रतियोगिता में उत्तीर्ण बच्चों को पुरस्कृत किया जाता है। मेरे विद्यालय में प्रायोगिक शिक्षा पर भी ध्यान दिया जाता है। हमारे शिक्षक हमारे भीतर कौशल के विकास पर भी ध्यान देते है।

हमारा और सरकार का यह दायित्व है की हमारा विद्यालय आदर्श विद्यालय बने। हमारे विद्यालय से आदर्श विद्यार्थी निकलने चाहिए, जो राष्ट्र को नई दिशा दे सके।  

निबंध 2 (400 शब्द) – विद्यालय की भूमिका

मेरा विद्यालय मुझे बहुत पसंद है। हमारा विद्यालय हमारे भविष्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी उपयोगिता कोई नज़रअंदाज नहीं कर सकता। विद्यालय ही है, जो हमें सामान्य से विशेष बनाता है। हमारी छिपी प्रतिभा को खोज निकालता है। हमारा स्वयं से साक्षात्कार कराता है।

विद्यालय की परिभाषा

विद्यालय अर्थात विद्या का आलय या घर। ऐसा स्थान जहां अध्ययन-अध्यापन के द्वारा शिक्षा प्रदान की जाती है।

विद्यालय की परिकल्पना

विद्यालय की परंपरा कोई नयी नहीं है। सदियों से हमारा देश ज्ञान का स्रोत रहा है। हमारे यहां आदिकाल से ही गुरुकुल परंपरा रही है। बड़े-बड़े राजा महाराजा भी अपना राजसी वैभव छोड़कर ज्ञान-प्राप्ति के लिए गुरुकुल जाते थे। यहा तक की ईश्वर के अवतार श्रीकृष्ण और श्रीराम भी पढ़ने के लिए गुरुकुल आश्रम गये थे। गुरू का स्थान ईश्वर से भी ऊपर होता है, संसार को ऐसी सीख दी।

विद्यालय की भूमिका

जिन्दगी का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है, हमारा बाल्यकाल। यही वो समय होता है जब हम केवल खुद के लिए जीते है। दोस्त बनाते हैं। दोस्तों के साथ हंसते है, रोते है। जीवन का असली आनंद अनुभव करते हैं। इन सब खुशी के पलों में हमारा विद्यालय हमारे साथ होता है।

कभी-कभी तो मां-बाप से ज्यादा नजदीकी हमारे शिक्षक हो जाते है। हमें हर कदम पर थामने और सम्भालने के लिए तैयार रहते है। मां-बाप के डर के कारण बहुत से बच्चे अपने शिक्षकों से ही अपनी परेशानियां बताते है। विद्यार्थी के जीवन को सही राह एक शिक्षक ही दिखाता है।

विद्यालय सरकारी और निजी दोनों प्रकार होते है। आजकल ऐसी लोगों की धारणा हो गयी है कि केवल निजी विद्यालयों में ही पढ़ाई होती है। यह धारण गलत है। इसी बात का लाभ ढ़ेरो  विद्यालय वाले उठाते है। हर माता-पिता अपने बच्चों को श्रेष्ठ शिक्षा देना चाहते है। किंतु सबकी हैसियत इतनी नहीं होती कि वो इन विद्यालयों की मोटी शुल्क राशि को भर सकें।

आजकल शिक्षा का व्यवसायीकरण हो गया है। सभी केवल अपनी जेब भरने में लगे है। बच्चों के भविष्य की किसी को चिंता नहीं है। दिन पर दिन शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है। विद्यालय ही तो वो जरिया होता है, जहां से देश के भविष्य का सृजन होता है। सरकार ने इस संबंध में कई नियम बनाये हैं। किन्तु पालन तो आम जनता को ही करना है।

निबंध 3 (500 शब्द) – विद्यालय की विशेषताएं व प्रकार

मेरे विद्यालय का नाम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय है। मेरे विद्यालय का परिसर काफी बड़ा है। मेरे विद्यालय में दो-दो मंजिल की चार इमारतें है। इसके चारों तरफ बड़े-बड़े पेड़ लगे हुए है। इसमें बड़े-बड़े पचास से भी ज्यादा कमरे है। हर कमरे में बड़ी-बड़ी खिड़कियां और दो-दो दरवाजे है। बड़े-बड़े तीन खेल के मैदान है। साथ में लगा हुआ बास्केट-बॉल कोर्ट भी है।

हमारे विद्यालय में पचास से ज्यादा शिक्षक-शिक्षिकाएं हैं। सभी बहुत ही सहृदयी और मिलनसार है। बच्चों की हर संभव सहायता करते है।

विद्यालय की विशेषताएं

नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क 2005 (NCF 2005) और शिक्षा का अधिकार 2009 (RTE 2009) ने कुछ मानक तय कर रखे हैं, जिसके अनुसार ही विद्यालय की बनावट और वातावरण होना चाहिए। नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क 2005 (NCF 2005) ने भारत में शिक्षा के स्तर में प्रोन्नति हेतु महत्वपूर्ण कदम उठायें हैं। जो बहुत कारगर भी सिध्द हुएं हैं। RTE 2009 ने विद्यार्थियों के समग्र विकास में विद्यालय की विशेष और महत्वपूर्ण भूमिका बतायी है। विद्यालय की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह बच्चों की हर छोटी-बड़ी आवश्यकताओं का ध्यान रखे।

मानक के अनुसार कुछ विशेषताएं अधोलिखित हैं-

  • शांत वातावरण होना चाहिए।
  • ट्रेंड टीचर्स होने चाहिए।
  • विद्यालय का बोर्ड परीक्षाओं में श्रेष्ठ प्रदर्शन होना चाहिए।
  • नियमित गृह कार्य दिया जाना चाहिए।
  • छात्र/छात्राओं के मूल्यांकन हेतु सतत मूल्यांकन पद्धति अपनायी जानी चाहिए।
  • स्वाध्याय हेतु एक पुस्तकालय एवं वाचनालय होना चाहिए।
  • अतिरिक्त पाठ्येतर गतिविधि पर बल देना चाहिए ।
  • विभिन्न विषयों में प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था होनी चाहिए
  • अध्यापन हेतु कक्ष विशाल और हवादार होने चाहिए।
  • सी० बी० एस० ई० के निर्देशानुसार सत्र 2009 – 2010 से ही कक्षा 9 व् 10 में भी अंको के स्थान पर ग्रेडिंग व्यवस्था लागू कर दिया गया है, जिसका पालन होना चाहिए।
  • शीतल पेय-जल की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए ।
  • समुचित शौचालयों का प्रबंध होना चाहिए ।
  • शारीरिक, योग, नृत्य एवं संगीत शिक्षा की उचित व्यवस्था होनी चाहिए ।
  • छात्रो की अंतः क्रियाओं एवं मानसिक विकास हेतु वाद-विवाद प्रतियोगिता आदि कराना चाहिए।
  • विद्यालय की वार्षिक पत्रिका छपनी चाहिए, जिसमें हर क्षेत्र के मेधावी बच्चों का उल्लेख होना चाहिए।
  • सभी कक्षाओं में स्मार्ट कक्षा की व्यवस्था होना चाहिए ।

विद्यालय के प्रकार

बचपन से बड़े होने तक हम अलग-अलग विद्यालयों में पढ़ते है। विद्यालयों के भी कई प्रकार होते हैं, जैसे

  • आंगनवाड़ी – आंगनवाड़ी में सामान्यतः छोटे बच्चों को बैठना और बाकी आधारभूत चीजें सिखाते हैं।
  • प्राथमिक विद्यालय – प्राथमिक पाठशाला में एक से पाँच तक की पढ़ाई होती है।
  • माध्यमिक विद्यालय – इस व्यवस्था में प्रथम से आठवीं तक की शिक्षा दी जाती है। कभी-कभी यह कक्षा छः से आठ तक भी होती है।
  • उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय – बारहवीं तक की शिक्षा यहां संपादित होती है।

विद्यालय में जब हमारा दाखिला होता है तो उस वक़्त हम नन्हें पौधे रहते हैं। हमारा विद्यालय ही हमे सींच कर बड़ा वृक्ष बनाता है। और इस दुनिया में रहने योग्य बनाता है। अपने जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घड़ियां हम अपने विद्यालय में ही बिताते है। बड़े होने पर हम सबसे अधिक विद्यालय में बिताये लम्हों को ही याद करते हैं।

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FAQs: Frequently Asked Questions on My School (मेरा स्कूल पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

उत्तर- सन 1715 में, संत जॉर्ज एंग्लो-इंडियन हायर सेकेंडरी स्कूल, चेन्नई में है।

उत्तर- तक्षशिला

उत्तर- सन 1848 में सावित्री बाई फुले ने देश का पहला बालिका विद्यालय खोला था।

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Essay on My School in Hindi – मेरा विद्यालय पर निबंध 150, 300 और 600 शब्दों में

Essay on My School in Hindi

Essay on My School in Hindi : हमारी जिंदगी में विद्यालय और शिक्षा काफी महत्व रखती है। बिना विद्यालय और शिक्षा के हम एक अच्छे जीवन की कल्पना नही कर सकते है। इसलिए हमें विद्यालय के महत्व को जानना बहुत ज़रूरी है।

स्कूलों में अक्सर मेरा विद्यालय पर निबंध लिखने के लिए दिया जाता है। अगर आपको भी Mera  School Par Nibandh लिखने के लिए कहा गया है, तो इस आर्टिकल को अंत तक पढ़े। मेरा विद्यालय निबंध हिंदी में Class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7 और 8 सभी के लिए उपयोगी हैं। मैने यहां पर My School Essay in Hindi में 150, 300 और 600 शब्दों में लिखा है।

मेरा विद्यालय पर निबंध 150 शब्दों में (Essay on My School in Hindi)

स्कूल विद्या का मंदिर होता है, जहां पर हमें विद्या (शिक्षा) मिलती है। विद्यालय में हम शिक्षा के महत्व को समझते है, और शिक्षा की मदद से हम अपनी जिंदगी को एक सही दिशा देते है।

अगर मैं अपने स्कूल की बात करूँ तो मेरे स्कूल का नाम “ महावीर विद्या मंदिर ” है, जो राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित है। मेरा स्कूल शहर से थोड़ी दूर शांत जगह पर है, जहां हम बस की मदद से जाते है। मेरे स्कूल में लगभग 1000 छात्र पढ़ते हैं, और सभी छात्र अनुशासन में रहते है।

मेरे विद्यालय का भवन काफी सुंदर है, जहां पर सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां पर एक बड़ा खेल का मैदान, एक पुस्तकालय, एक विज्ञान की प्रयोगशाल और एक कंप्यूटर लैब है। इसके अलावा एक बहुत बड़ा हॉल भी हैं, जहां हम सभी मिलकर सुबह-सुबह प्रार्थना करते है।

मेरे विद्यालय में अनेक तरह के खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते है। मेरे स्कूल के सभी अध्यापक और अध्यापिकाएँ बहुत अच्छी हैं, जो हमें प्यार से पढ़ाते हैं। मुझे यहां पर बहुत कुछ सिखने को मिल रहा है, और मैं अपने स्कूल को बहुत प्यार करता हूँ।

मेरा विद्यालय पर निबंध 300 शब्दों में (My School Essay in Hindi)

प्रस्तावना.

विद्यालय हमारी जिंदगी का काफी अहम हिस्सा है। जब बड़े हो जाते है, तब भी स्कूली घटनाएं हमारी जिंदगी की सबसे यादगार घटनाओं में से एक होती है। क्योंकि स्कूल के साथ हमारे बच्चपन की यादे जुड़ी होती है। विद्यालय हमें जिंदगी में आगे बढ़ना सिखाता है।

विद्यालय की परीभाषा

विद्यालय एक ऐसा स्थान है, जहां पर शिक्षा ग्रहण की जाती है। यहां पर बच्चों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं नैतिक गुणों का विकास होता है। यह एक मंदिर है जहां सभी प्रकार के बच्चे एक ही तरह की ड्रेस पहनकर पढ़ाई करते है।

विद्यालय में बिना भेदभाव के अध्यापक बच्चों को शिक्षा देते है। यहां पर बच्चों को शिक्षा, ज्ञान और कौशल प्राप्त होता है, और अंतत बच्चे का व्यक्तित्व निर्माण होता है।

मेरे विद्यालय का भवन

मेरे स्कूल का नाम “ महावीर विद्या मंदिर ” है, और यह राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थिति है। मेरा विद्यालय भवन तीन मंजिला है, जहां सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध है। मेरे स्कूल में कक्षा 10वीं तक पढ़ाई करवाई जाती हैं। मेरे स्कूल में एक बड़ा हॉल और एक बड़ा खेलकूद का मैदान भी है।

मेरे विद्यालय में बड़ी-बड़ी कक्षाएं, एक पुस्तकालय, एक विज्ञान की प्रयोगशाला, और कंप्यूटर लैब भी है। मेरे विद्यालय में प्रेवश करते ही सामने प्रधानाचार्य का ऑफिस है। इसके अलावा विद्यालय के चारों तरफ पेड़-पौधे भी हैं।

मेरा विद्यालय की अध्यापक-अध्यापिकाएँ

मेरे स्कूल में कुल आठ अध्यापक और अध्यापिकाएँ हैं, जो काफी अच्छे से पढ़ाती है। मेरी स्कूल के सभी टीचर्स अनुभवी और विद्वान है। मेरे विद्यालय में सभी तरह के विषय पढ़ाए जाते हैं, जैसे- हिंदी, गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान आदि। और सभी विषय के लिए विशेष अनुभवी अध्यापक मौजुद है।

मेरी स्कूल एक पीटी टिचर और एक योगा टीचर भी है, जो हमारी शेहत का ख्याल रखते है। हमारी स्कूल में समय-समय पर खेल प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते है, जिसमें सभी अध्यापक अपना योगदान देते है।

विद्यालय में अनुशासन

मेरे विद्यालय में काफी अनुशासन है, और इसके लिए विद्याल में कुछ कठोर नियम भी बनाए गए हैं। सभी विद्यार्थी नियमों की पालना करते है, और स्कूल में अनुशासन बनाए रखते है। विद्यालय में अनुशासन बहुत जरूरी है, क्योंकि बिना अनुशासन के पढ़ाई नही की जा सकती है।

उपसंहार

मेरा विद्यालय बहुत अच्छा है, जहां मुझे सभी तरह की सुविधाएं मिलती है। मुझे पूरा यकिन है कि मैं यहां पर पढ़कर एक अच्छा इंसान बनूंगा, और अपने पूरे परिवार व स्कूल का नाम रोशन करूंगा। मैं अपने सभी अध्यापकों का धन्यवाद करता हूँ, जो मुझे इतना अच्छे से और प्यार से पढ़ा रहे है।

Essay on My School in Hindi से हम विद्यालय के महत्व को समझ सकते है।

मेरा विद्यालय पर निबंध 600 शब्दों में (Essay on My School in Hindi)

उपसंहार (विद्यालय का परिचय).

 स्कूल एक ऐसा स्थान है जहां पर हम धीरे-धीरे बड़े होते है, और हमारे व्यक्तित्व का निर्माण होता है। मेरा अधिकतर समय स्कूल में बितता है, जहां मैं अपने दोस्तों के साथ पढ़ाई भी करता हूँ और मस्ती भी करता हूँ। मेरी स्कूल का नाम “ महावीर विद्या मंदिरा उच्च माध्यमिक विद्यालय ”  है, जहां 12वीं तक के विद्यार्थियों को पढ़ाया जाता है।

मेरा विद्यालय बहुत अच्छा है, जहां पर सभी अध्यापक अच्छे और अनुभवी है, और सभी सुख-सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां पर पढ़ाई करने योग्य अनुकूल माहौल है। मेरे स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ नैतिक शिक्षा और कौशल पर भी ध्यान दिया जाता है। सच में, मेरा विद्यालय काफी अच्छा है, जिसे मैं बहुत प्यार करता हूँ।

विद्यालय क्या है, इसके प्रकार

विद्यालय का शाब्दिक अर्थ होता है- विद्या और आलय। इसका मतलब है कि एक ऐसा स्थान जहां पर विद्या मिलती हो। प्राचीन समय में पहले गुरुकुल हुआ करते थे, जहां पर गुरू शिष्यों को अनेक तरह की शिक्षाएं देते थे। हालांकि अब गुरुकुल को विद्यालय और स्कूल बोला जाता है। और इसके साथ ही प्राचीन काल की तुलना में शिक्षा का ढंग भी बदल गया है। विद्यालय मंदिर का रूप होता है, जहां व्यक्ति के व्यक्तित्व का निर्माण होता है।

हम बचप्पन से बड़े होने तक अलग-अलग विद्यालयों में पढ़े हैं, जैसे- आंगनवाड़ी, प्राथमिक विद्यालय, माध्यमिक विद्यालय और फिर उच्च माध्यमिक विद्यालय। इसके बाद महाविद्यालय (कॉलेज) में जाकर पढ़ाई करते है।

इसके अलावा भी विद्यालय के अन्य प्रकार होते हैं, जैसे- सरकारी विद्यालय, निजी विद्यालय, आवासीय विद्यालय, धार्मिक विद्यालय, कौशल निर्माण विद्यालय और सैनिक विद्यालय।

मेरे विद्यालय की विशेषताएं

मेरा विद्यालय काफी अच्छा हैं, जहां सभी सुविधाएं दी गयी है। यहां पर कोई भी बच्चा आसानी से पढ़ सकता है। मेरे स्कूल की निम्नलिखित विशेषताएं हैं-

  • मेरा विद्यालय शहर से थोड़ा दूर शांत जगह पर है, और चारों तरफ खुला वातावरण है।
  • मेरे स्कूल में सभी विषय के लिए विशेष अनुभवी अध्यापक और अध्यापिकाएं हैं।
  • मेरा स्कूल तीन मंजिला है, और स्कूल के बाहर एक गार्डन भी है।
  • स्कूल में एक प्रार्थन हॉल, एक पुस्तकालय, एक कंप्यूटर लैब, और एक विज्ञान प्रयोगशाला है।
  • विद्यालय में शीतल जल और शुद्ध पानी की व्यवस्था है।
  • विद्यालय में अनेक खेलकूद और सांस्कृतिक प्रोग्राम होते हैं।
  • मेरे स्कूल में पढ़ने के लिए काफी अच्छा वातावरण है।
  • मेरे विद्यालय में काफी अच्छा अनुशासन है।
  • मेरे स्कूल में कक्षा 12 तक पढ़ाई करवाई जाती हैं।

मेरे विद्यालय में विद्यार्थियों का अनुशासन

मेरे विद्यालय में सबसे ज्यादा अनुशासन पर ध्यान दिया जाता है। क्योंकि जब तक अनुशासन नही होगा, तब तक पढ़ाई संभव नही है। अनुशासन की वजह से ही सभी कक्षाएं समय पर लगती है, और बच्चे भी समय पर स्कूल आते है। व्यक्ति के जीवन में अनुसाशन होना बहुत जरूरी है, और यह अनुसाशन स्कूल की मदद से ही आता है।

हमारी स्कूल में अच्छा अनुसाशन होने की वजह से हम समय पर पढ़ते है और समय पर खेलते भी हैं। जिंदगी में अनुशासन का होना बेहद ज़रूरी है।

मेरे विद्यालय की शिक्षण प्रणाली

एक अच्छे विद्यालय में अच्छी शिक्षण प्रणाली होना बहुत ज़रूरी है, और मेरे विद्यालय में है। मेरे स्कूल में एक दिन में दो पारीयां चलती हैं, जिसमें सुबह के समय प्राथमिक कक्षा से 6वीं कक्षा के विद्यार्थी आते है। और फिर 12 बजे के बाद 7वीं कक्षा से 12 कक्षा के विद्यार्थी आते है।

मेरे स्कूल में रेगुलर क्लासेस चलती है, और बीच में रेस्ट भी मिलती है। पढ़ाई के बाद बच्चों को खेलने का समय भी दिया जाता है। इसके अलावा जो भी बच्चे पढ़ाई में कमजोर होते है, उन्हे विशेष क्लासेस भी दी जाती है।

सभी कक्षाओं में समय-समय पर टेस्ट भी होते हैं, ताकि बच्चों की स्थिति का पता चल सके।

प्रतियोगिताओं का आयोजन

मेरे विद्यालय में हर साल अनेक तरह की प्रतियोगिताएं भी होती है जैसे- चित्र-कला, वाद-विवाद, कविताएँ आदि, ताकि हम पढ़ाई के साथ-साथ अन्य कौशल भी सीख सके। यहां पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते है, जिससे हमें काफी कुछ नया सिखने को मिलता है।

विद्यालय के प्रति हमारा कर्तव्य

विद्यालय एक विद्या का मंदिर है, जिसके प्रति हर विद्यार्थी के कुछ कर्तव्य होते हैं। हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य है कि हम अपने स्कूल में अनुसाशन को बनाए रखे। और अच्छा रिजल्ट प्राप्त करके स्कूल का नाम रोशन करें। हमे अपने शिक्षकों को सम्मान देना चाहिए, और उन्हे अपनी लाइफ में हमेशा याद रखना चाहिए।

विद्यालय एक बच्चे के जीवन में काफी अहम भूमिका निभाता है, क्योंकि विद्यालय से बच्चे को शिक्षा, ज्ञान और कौशल मिलता है,और एक अच्छा व्यक्तित्व का निर्माण होता है। यहां पर मुझे पढ़ाई के साथ-साथ और भी कई तरह के अनुभव भी मिल रहे है। मैं अपनी स्कूल को बहुत प्यार करता हूं, और मैं हमेशा अपने विद्यालय पर गर्व महसूस करूंगा।

मेरा विद्यालय पर निबंध हिंदी में 10 लाइन (Mera  School Par Nibandh)

  • मेरी स्कूल का नाम “महावीर विद्या मंदिर माध्यमिक विद्यालय” है जो शहर कुछ दूर स्थित है।
  • मेरा विद्यालय एक शांत जगह पर है, जहां पढ़ाई का माहौल काफी अच्छा है।
  • मेरे विद्यालय में बहुत सारे कमरे, प्रार्थना स्थ, खेलकूद का मैदान, पुस्तकालय और लैब उपलब्ध हैं।
  • मेरे स्कूल में रोज़ाना सुबह 30 मिनट तक प्रार्थना होती है, और फिर भोजन से पूर्व भी छोटी-सी प्रार्थना होती है।
  • मेरे विद्यालय में प्रत्येक विषय को पढ़ाने के लिए अनुभवी और योग्य शिक्षक मौजुद हैं।
  • स्कूल में बच्चों के प्रति प्रधानाचार्य और सभी शिक्षकों का काफी अच्छा व्यवहार है।
  • मेरे स्कूल में अनुशासन पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाता है।
  • स्कूल के बाहर गार्डन में सभी बच्चे रोज़ाना खेलते है।
  • मेरे विद्यालय में हर साल अनेक तरह के सांस्कृतिक प्रोग्राम और प्रतियोगिताएं होती हैं।
  • मैं अपने स्कूल से काफी प्यार करता हूँ, और मैं अपने स्कूल के लिए गर्व महसूस करता हूं।

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दा इंडियन वायर

मेरा विद्यालय पर निबंध

my school essay hindi

By विकास सिंह

my school essay in hindi

एक स्कूल एक संस्था है, जो या तो सरकारी या निजी निकाय द्वारा संचालित है, सभी आयु वर्ग के छात्रों को व्यवस्थित और अनुशासित तरीके से शिक्षा प्रदान करने के लिए यह संस्था कार्य करती है।

मेरा विद्यालय पर निबंध, my school essay in hindi (100 शब्द)

मेरा स्कूल चार मंजिला इमारत है। यह एक मंदिर की तरह है जहां हम रोजाना पढ़ाई करने जाते हैं। सुबह-सुबह सबसे पहले हम अपने बेहतर अध्ययन के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं और अपने क्लास टीचर को गुड मॉर्निंग कहते हैं। फिर हम अपने पाठ्यक्रम के अनुसार अध्ययन शुरू करते हैं।

मुझे रोजाना स्कूल जाना पसंद है। मेरे विद्यालय में बहुत कठोर अनुशासन है जिसका हमें नियमित रूप से पालन करने की आवश्यकता है। मुझे अपनी स्कूल ड्रेस बहुत पसंद है। यह मेरे मीठे घर से लगभग 2 किमी दूर स्थित है। मैं पीले स्कूल की बस से स्कूल जाता हूँ। मेरा स्कूल शहर के प्रदूषण, शोर, धूल, शोर और धुएं से रहित बहुत ही शांत जगह पर है।

मेरा विद्यालय पर निबंध, my school essay in hindi (150 शब्द)

school

मेरा विद्यालय लाल रंग की तीन मंजिला इमारत में बहुत उत्कृष्ट है। मुझे उचित वर्दी में दैनिक आधार पर स्कूल जाना पसंद है। मेरा क्लास टीचर बहुत दयालु है और हमें स्कूल अनुशासन का पालन करना सिखाता है। मेरा स्कूल बहुत अच्छी जगह शहर की सभी भीड़ और शोर से दूर है।

मेरे स्कूल के मुख्य द्वार के पास दो छोटे हरे बाग हैं जहाँ बहुत सारे रंग-बिरंगे फूलों के बिस्तर, घास के लॉन, फलों के पेड़ और दो खूबसूरत बौछारें हैं।मेरे स्कूल में बहुत सारी सुविधाएं हैं जैसे एक कंप्यूटर लैब, दो साइंस लैब, एक बड़ी लाइब्रेरी, एक सामान्य पढ़ने का कमरा, एक बड़ा खेल का मैदान, एक अच्छा स्टेज और एक स्थिर दुकान।

मेरे स्कूल में 12 वीं कक्षा के छात्रों के लिए नर्सरी की कक्षाएं हैं। मेरे स्कूल में पुरुषों और महिलाओं सहित लगभग सात उच्च योग्य शिक्षक, 20 हेल्पर्स, एक प्रिंसिपल और 10 गेट कीपर हैं। मेरे शिक्षक हमें बहुत विनम्रता से पढ़ाते हैं और हमें बहुत ही रचनात्मक और आकर्षक तरीके से विषयों को सीखाते हैं।

मेरा स्कूल पर निबंध, essay on my school in hindi (250 शब्द)

school

स्कूल सीखने का मंदिर है और पेशेवर और सामाजिक जीवन के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। मेरा स्कूल दान की गई धन की मदद से 1990 में दान की गई भूमि पर स्थापित किया गया था। मेरे स्कूल का माहौल बहुत सुखद है और स्कूल का माहौल बहुत साफ और आकर्षक है।

मेरा स्कूल भवन खेल के मैदान के केंद्र में स्थित है। स्कूल के एक तरफ एक बड़ा बगीचा है जिसमें छोटे तालाब हैं। इस तालाब में कई रंगीन मछलियाँ और अन्य पानी के जानवर हैं। मेरा स्कूल चार मंजिला इमारत है जिसमें 12 वीं कक्षा के छात्रों के लिए नर्सरी की कक्षाएं हैं।

मेरे स्कूल में एक बड़ी लाइब्रेरी, प्रिंसिपल ऑफिस, हेड ऑफिस, क्लर्क ऑफिस, एक साइंस लेबोरेटरी, एक कंप्यूटर लैब, एक कॉमन स्टडी रूम, एक बड़ी लॉबी, टीचर कॉमन रूम, एक बड़ा स्पोर्ट्स ग्राउंड, लड़कियों और लड़कों के लिए एक अलग हॉस्टल है। स्कूल परिसर।

मेरे स्कूल में उच्च योग्य और अनुभवी शिक्षक हैं जो हमें बहुत प्रभावी और रचनात्मक तरीके से पढ़ाते हैं। मेरे स्कूल में लगभग एक हजार छात्र हैं जो हमेशा स्कूल के बाहर या स्कूल के अंदर आयोजित प्रतियोगिताओं में उच्च रैंक प्राप्त करते हैं। हम सभी उचित वर्दी में स्कूल जाते हैं। हमारे पास दो प्रकार की वर्दी है, एक समान वर्दी और दूसरी घर की वर्दी।

मेरे स्कूल की समयावधि सुबह 7.50 बजे और गर्मियों के मौसम में दोपहर में 1.30 बजे और सुबह 8.50 बजे और सर्दियों के मौसम में शाम को 3.30 बजे शुरू होती है। हम रोज़ाना कुछ समय के लिए लाइब्रेरी जाते हैं जहाँ हम अपने कौशल और सामान्य ज्ञान को बढ़ाने के लिए रचनात्मक किताबें और अखबार पढ़ने का अभ्यास करते हैं।

मेरा स्कूल पर निबंध, essay on my school in hindi (300 शब्द)

मेरा विद्यालय मेरे घर से लगभग 1 किमी दूर स्थित है। यह बहुत साफ और शांतिपूर्ण दिखता है। मेरा स्कूल एक मंदिर की तरह है जहाँ हम रोज़ जाते हैं, भगवान से प्रार्थना करते हैं और एक दिन में 6 घंटे पढ़ाई करते हैं। मेरे स्कूल के अध्यापक बहुत ही सराहनीय हैं क्योंकि वे सभी को बहुत ही संयम के साथ सिखाते हैं।

मेरे स्कूल में अध्ययन, स्वच्छता और वर्दी के सख्त मानदंड हैं। मुझे रोज़ाना स्कूल जाना पसंद है क्योंकि मेरी माँ कहती है कि रोज़ाना स्कूल जाना और सभी अनुशासन का पालन करना बहुत आवश्यक है। स्कूल शिक्षा का एक मंदिर है जहाँ हम बहुत रचनात्मक रूप से सीखने की प्रक्रिया में शामिल होते हैं। हम अपने अध्ययन के साथ अन्य चीजों को भी सीखते हैं जैसे अनुशासन, शिष्टाचार, अच्छा व्यवहार, समय की पाबंदी और कई अन्य शिष्टाचार।

मेरे विद्यालय का वातावरण अद्भुत है जहाँ बहुत सारे प्राकृतिक दृश्य और हरियाली उपलब्ध हैं। एक बड़ा बगीचा और तालाब है जिसमें मछली, मेंढक, रंग-बिरंगे फूल, पेड़, सजावटी पेड़, हरी घास आदि हैं। अन्य चीजें जैसे बड़े प्ले ग्राउंड, स्कूल के चारों ओर बड़े खुले स्थान मेरे स्कूल को एक प्राकृतिक सुंदरता देते हैं।

यहां क्रिकेट नेट, बास्केट बॉल कोर्ट और स्केटिंग ग्राउंड की भी सुविधा है। मेरा स्कूल सीबीएसई बोर्ड के मानदंडों का पालन करता है। मेरा विद्यालय नर्सरी से 12 वीं कक्षा तक के छात्रों को कक्षाओं की सुविधा प्रदान करता है। मेरे स्कूल के प्रिंसिपल स्कूल के अनुशासन, स्वच्छता और स्वच्छता के बारे में बहुत सख्त हैं।

मेरा विद्यालय उन छात्रों को बस सुविधा प्रदान करता है जो विद्यालय से दूर स्थित हैं। सभी छात्र सुबह खेल मैदान में इकट्ठा होते हैं और मॉर्निंग प्रेयर करते हैं और फिर अपने-अपने क्लास रूम में पहुंच जाते हैं। मेरा स्कूल हर साल नर्सरी कक्षा (लगभग 2000) छात्रों को प्रवेश प्रदान करता है।

मेरे पास अलग-अलग कक्षाओं के लिए अलग-अलग शिक्षक हैं जैसे पीटी, मैथ्स, अंग्रेजी, हिंदी, जी.के., संगीत, नृत्य, पेंटिंग और ड्राइंग। मेरे स्कूल में एक बड़ा पुस्तकालय, स्टेशनरी की दुकान और स्कूल परिसर के अंदर कैंटीन है। मेरा स्कूल हर साल सभी कक्षाओं के लिए एक वार्षिक समारोह आयोजित करता है जिसमें हमें भाग लेना चाहिए।

मेरी पाठशाला पर निबंध, my school essay in hindi (400 शब्द)

मेरा स्कूल बहुत भव्य है, जिसमें तीन मंजिला प्रभावशाली ढंग से संरचित इमारत और शहर के केंद्र में स्थित है। यह मेरे घर से लगभग 3 किमी दूर स्थित है और मैं बस से स्कूल जाता हूँ। मेरा स्कूल राज्य के सर्वश्रेष्ठ स्कूलों में से एक है जहाँ मैं रहता हूँ। यह बिना किसी प्रदूषण, शोर और धूल के बहुत शांतिपूर्ण जगह पर स्थित है।

स्कूल की इमारत के दोनों सिरों पर दो सीढ़ियाँ हैं जो हमें हर मंजिल तक ले जाती हैं। इसमें पहली मंजिल पर अच्छी तरह से सुसज्जित और बड़ी लाइब्रेरी, अच्छी तरह से इंस्ट्रूमेंटेड साइंस लैब और एक कंप्यूटर लैब है। भूतल पर एक स्कूल सभागार है जहाँ सभी वार्षिक कार्य, बैठकें, पीटीएम, नृत्य प्रतियोगिताएं होती हैं।

प्रधान कार्यालय, क्लर्क कक्ष, स्टाफ रूम और सामान्य अध्ययन कक्ष भूतल पर स्थित हैं। स्कूल की कैंटीन, स्टेशनरी की दुकान, शतरंज का कमरा और स्केटिंग हॉल भी भूतल पर स्थित हैं। मेरे स्कूल में स्कूल प्रिंसिपल ऑफिस के सामने दो बड़े सीमेंटेड बास्केटबॉल कोर्ट हैं, जबकि फुटबॉल का मैदान इसके साइड में है।

मेरे स्कूल में एक छोटा सा हरा-भरा बगीचा है, जो हेड ऑफिस के सामने, रंग-बिरंगे फूलों और सजावटी पौधों से भरा है, जो पूरे स्कूल परिसर की शोभा बढ़ाते हैं। मेरे विद्यालय में लगभग 1500 छात्रों ने प्रवेश लिया है। वे हमेशा किसी भी अंतर-स्कूल प्रतियोगिताओं में उच्च रैंक करते हैं।

मेरे विद्यालय के अध्ययन मानदंड बहुत ही रचनात्मक और नवीन हैं जो किसी भी कठिन मामले को बहुत आसानी से समझने में हमारी मदद करते हैं। हमारे शिक्षक हमें बहुत ईमानदारी से सिखाते हैं और हमें व्यावहारिक रूप से सब कुछ बताते हैं।

मेरा स्कूल किसी भी कार्यक्रम में इंटर-स्कूल सांस्कृतिक गतिविधियों और खेल गतिविधियों जैसे पहले स्थान पर है। मेरा स्कूल वर्ष के सभी महत्वपूर्ण दिन मनाता है जैसे कि खेल दिवस, शिक्षक दिवस, अभिभावक दिवस, बाल दिवस, स्कूल वर्षगांठ दिवस, संस्थापक दिवस, गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, क्रिसमस दिवस, मातृ दिवस, वार्षिक समारोह, हैप्पी न्यू ईयर , महात्मा गांधी जन्मदिवस, आदि भव्य तरीके से।

हम सह-पाठयक्रम गतिविधियों जैसे तैराकी, स्काउटिंग, एनसी, स्कूल बैंड, स्केटिंग, गायन, नृत्य इत्यादि में भाग लेते हैं। अनुचित व्यवहार और अनुशासनहीन गतिविधियों वाले छात्रों को स्कूल के मानदंडों के अनुसार कक्षा शिक्षक द्वारा दंडित किया जाता है।

हमारे प्रिंसिपल हमारे चरित्र गठन, शिष्टाचार, नैतिक शिक्षा, अच्छे मूल्यों को प्राप्त करने और दूसरों का सम्मान करने के लिए मीटिंग हॉल में रोजाना 10 मिनट तक हर छात्र की कक्षाएं लेते हैं। हमारे स्कूल का समय बहुत ही रोचक और सुखद है क्योंकि हम रोजाना बहुत सारे रचनात्मक और व्यावहारिक काम करते हैं।

कहानीकार, गायन, कविता पाठ, हिंदी और अंग्रेजी में वार्तालाप का हमारा मौखिक मूल्यांकन दैनिक आधार पर कक्षा शिक्षक द्वारा लिया जाता है। तो, मेरा स्कूल दुनिया का सबसे अच्छा स्कूल है।

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विकास नें वाणिज्य में स्नातक किया है और उन्हें भाषा और खेल-कूद में काफी शौक है. दा इंडियन वायर के लिए विकास हिंदी व्याकरण एवं अन्य भाषाओं के बारे में लिख रहे हैं.

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मेरा विद्यालय पर निबंध Essay on My School in Hindi

मेरा विद्यालय पर निबंध Essay on My School in Hindi

इस पोस्ट में हमने मेरा विद्यालय पर निबंध (Essay on My School in Hindi) हिन्दी में लिखा है। स्कूल के विद्यार्थी जो मेरी पाठशाला पर निबंध की खोज में हैं वे इस स्कूल पर सुंदर निबंध की मदद ले सकते हैं।

यह मेरी पाठशाला या मेरा विद्यालय पर निबंध Essay on My School in Hindi – Class 3, 4, 5, 7 मे अधिकतर पूछा जाता है।

Table of Content

मेरा विद्यालय पर निबंध Essay on My School in Hindi (1000 Words)

विद्यालय एक ऐसा स्थान है, जहां लोग बहुत कुछ सीखते हैं और पढ़ते हैं। इसे ज्ञान का मंदिर कहा जाता है। अपने विद्यालय या पाठशाला में हम सब जीवन का सबसे ज्यादा समय व्यतीत करते हैं जिसमे हम कई विषयों में शिक्षा लेते हैं ।

स्कूल में हमारे अध्यापक गण अपना ज्ञान हमें प्रदान कर सफलता पाने का सही रास्ता दिखाते हैं। आज इस लेख में मैंने मेरे विद्यालय पर बच्चों और विद्यार्थियों के लिए निबंध प्रस्तुत किया है।

मेरे विद्यालय का नाम और रूप Name and Structure of My School

मेरे विद्यालय का नाम अरविन्द पब्लिक स्कूल है। मेरा विद्यालय बहुत बड़ा और भव्य है, यह भुबनेश्वर में स्थित है।  यह तीन मंजिला है और इसकी  इमारत बहुत ही सुन्दर है। यह मेरे घर के पास शहर के केंद्र में स्थित है।

विद्यालय की दूरी कम होने के कारण मैं चलकर ही विद्यालय जाता हूं। मेरा विद्यालय पूरे राज्य में सबसे अच्छा और बड़ा है। मेरे विद्यालय के चारों ओर का स्थान बहुत शांतिपूर्ण और प्रदूषण से मुक्त है।

मेरे विद्यालय की सुविधाएँ Facilities in My School

सबसे नीचे विद्यालय में ऑडिटोरियम है जहां सभी वार्षिक कार्य और बैठकें संपन्न होती हैं। स्कूल में दोनों सिरों पर सीढ़ियां हैं, जो हमें हर एक मंजिल तक ले जाती हैं।

पहली मंजिल पर एक बड़ा पुस्तकालय है, जो कि पुस्तकों से अच्छी तरह से सुसज्जित है इसमें अनेक विषयों से संबंधित किताबे है। यहां पर वाद्य यंत्र की कक्षायें भी है इसके अलावा एक विज्ञान प्रयोगशाला है।

इसमें विज्ञान और वाणिज्य में 12 वीं कक्षा के छात्रों के लिए कक्षाएं हैं तथा नर्सरी के बच्चों के लिए भी यही कक्षायें बनायी गई है और दूसरी मंजिल पर एक कंप्यूटर प्रयोगशाला है, तथा यहाँ पर कक्षा पांच से दश तक के छात्र एवं छात्राओं की पढाई के लिए उत्तम व्यवस्था की गई है।

विद्यालय में पीने के पानी एवं शौचालय की भी उत्तम व्यवस्था है। शिक्षक सभी छात्रों के अंको और अन्य छात्रों से संबंधित बातों की पूर्ण जानकारी रखते है। विद्यालय में अलग-अलग कामों के लिये नौकर लगाये गये जो अपने-अपने कामों को नियम पूर्वक करते है।

जिसमें से एक रात्री के समय विद्यालय की देखभाल के लिये वहां रहता भी है। उसके लिए विद्यालय के किनारे पर एक छोटा सा घर बनाया गया है।  

हम सभी बच्चों के खेलने के लिए एक बड़ा खेल का मैदान है जहाँ कई झूले है और एक बड़ा बगीचा है जिसमें कई सारे फूल खिले रहते है, कई आम और अमरुद के बड़े-बड़े पेड़ लगे है। सभी कक्षाएं बहुत हवादार और खुली हुई हैं।

ड्राइंग रूम, म्यूजिक रूम, साइंस लेबोरेटरीज और ऑडियो वीडियो रूम भी हैं। हमारे विद्यालय में पांच हजार छात्र हैं। जिनमें 2000 लड़कियां और 3000 लड़के है। हमारे स्कूल के ज्यादातर छात्र ज्यादातर स्कूल इंटर-स्कूल प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं और उच्च स्थान लाते हैं और सभी गतिविधियों का समर्थन करते है।

मेरे स्कूल के प्रधानाचार्य और शिक्षक Principal and Teachers of My School

हमारी प्रधानाचार्या श्रीमति कल्पना जी बहुत दयालु महिला हैं। हमारे स्कूल में, 90 शिक्षक हैं , जो हमें ज्ञान देते हैं। और हमें प्यार भी करते है। विभिन्न गतिविधियों और कार्यों को साल भर आयोजित किया जाता है। मुझे अपने स्कूल पर बहुत गर्व है।

मैं अपने स्कूल से प्यार करता हूं और सम्मान करता हूं। मेरे विद्यालय की कई अलग अलग शहरों में शाखाएं है। मेरे विद्यालय पीले रंग से रंग किया गया है। यह पीला रंग आँखों को लुभाता है इस कारण मेरा विद्यालय दूर से ही सबसे अनोखा दिखाई पड़ता है।

प्रिंसिपल ऑफिस, हेड ऑफिस, क्लर्क रूम, स्टाफ रूम और आम स्टडी रूम सबसे नीचे बने हुये हैं। स्कूल कैंटीन, स्टेशनरी की दुकान, शतरंज कक्ष, और स्केटिंग हॉल भी जमीन तल पर स्थित हैं। स्कूल के प्रधानाचार्या ऑफिस के सामने मेरे स्कूल में दो बड़ी सीमेंट वाली बास्केटबाल कोर्ट हैं जबकि फुटबॉल मैदान इसके दूसरे तरफ है। मेरे स्कूल में एक छोटा हराभरा उद्यान भी है, जो मुख्य कार्यालय के सामने, रंगीन फूलों और सजावटी पौधों से भरा है जो पूरे स्कूल परिसर की सुंदरता बढ़ाता है।

मेरे विद्यालय में शिक्षा व उत्सव Education and Celebrations in My School

मेरे स्कूल के अध्ययन मानदंड बहुत ही रचनात्मक हैं जो हमें किसी भी कठिन विषय को आसानी से समझने में मदद करते हैं। हमारे शिक्षक हमें बहुत ईमानदारी से सब कुछ सिखाते हैं और हमें व्यावहारिक रूप से ज्ञान भी देते हैं।

मेरे विद्यालय में साल के सभी महत्वपूर्ण दिन जैसे खेल दिवस , शिक्षक दिवस , मातृ-पितृ दिवस , बाल दिवस , सालगिरह दिवस, संस्थापक दिवस, गणतंत्र दिवस , स्वतंत्रता दिवस , क्रिसमस दिवस , मातृ दिवस, वार्षिक समारोह, नव वर्ष , गांधी जयंती, आदि एक भव्य तरीके से मनाये जाते है।

मेरा विद्यालय उन छात्रों को बस सुविधा प्रदान करता है जो बच्चे स्कूल से बहुत दूर रहते हैं। सभी छात्र सुबह खेल के मैदान में इकट्ठे होते हैं और सुबह की प्रार्थना करते हैं और फिर सभी अपनी कक्षाओं में जाते हैं।

मेरा स्कूल हर साल लगभग 2000 छात्रों को नर्सरी कक्षा में प्रवेश प्रदान करता है। मेरे विद्यालय में विभिन्न विषयों जैसे गणित, अंग्रेजी, हिंदी, मराठी, जीके, इतिहास, भूगोल, विज्ञान, चित्रकला, खेल और शिल्प इत्यादि के लिए अलग-अलग अध्यापक हैं।

मेरे विद्यालय में पाठ्यक्रम गतिविधियाँ Curriculum activities in My School

हमारे विद्यालय में तैराकी, स्काउटिंग, एनसीसी, स्कूल बैंड, स्केटिंग, गायन, नृत्य इत्यादि कई सह-पाठ्यचर्या गतिविधियाँ हैं। विद्यालय के मानदंडों के अनुसार कक्षा शिक्षक द्वारा अनुचित व्यवहार और अनुशासित गतिविधियों वाले छात्रों को दंडित भी किया जाता है।

हमारे प्रधानाचार्या हमारे चरित्र निर्माण, शिष्टाचार, नैतिक शिक्षा, अच्छे मूल्यों को प्राप्त करने और दूसरों का सम्मान करने के लिए 10 मिनट के लिए मीटिंग हॉल में प्रतिदिन प्रत्येक छात्र की कक्षाएं लेते हैं। इस तरह मेरी प्रधानाचार्या एक अच्छी शिक्षक भी है।

विद्यालय जाने का समय My School Time

विद्यालय जाने का समय सुबह 7:30 से 2:30 गर्मियों में और सर्दियों में 9:30 से 4:30 तक है। सभी छोटे बच्चों और बड़े बच्चों के लिये छुट्टी होने पर स्कूल से निकलने का अलग-अलग रास्ता है ताकि छोटे बच्चों को बाहर निकलने में कोई परेशानी न हो।

मेरा विद्यालय पर 10 लाइन 10 Lines on My School in Hindi

  • मेरा विद्यालय बहुत ही सुन्दर है।
  • मेरा विद्यालय ज्ञान का मंदिर है।
  • मेरे स्कूल में सभी प्रकार की शिक्षा और पाठ्यक्रम गतिविधियों की सुविधाएँ है।
  • मेरे विद्यालय में कक्षा 1 से 12 तक के बच्चों को शिक्षा दी जाती है।
  • मेरे विद्यालय में बहुत बड़ा खेलने का मैदान है जिसमे बच्चे फुटबॉल और क्रिकेट भी आसानी से खेल सकते हैं।
  • मेरे विद्यालय में शिक्षा बहुत ही अच्छे प्रिंसिपल और शिक्षक हैं।
  • मेरे स्कूल में सभी प्रकार के खेल-कूद की ट्रेनिंग दी जाती है।
  • स्कूल में कई प्रकार के प्रतियोगिताओं का आयोजन समय-समय पर किया जाता है।
  • मेरा विद्यालय बहुत ही साफ़-सुथरा है क्योंकि यहाँ स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत सफाई पर बहुत ध्यान दिया जाता है।
  • हर साल मेरे विद्यालय के सभी छात्र और अध्यापक पिकनिक मनाने जाते हैं।

निष्कर्ष Conclusion

हमारे विद्यालय के शिक्षक बहुत ही अनुभवी और योग्य है। शिक्षकों और हमारी प्राचार्या के नेतृत्व में हमारा विद्यालय लगातार उन्नति कर रहा है।  आशा करते हैं आपको मेरा विद्यालय पर निबंध Essay on My School in Hindi हिन्दी में अच्छा लगा होगा।

42 thoughts on “मेरा विद्यालय पर निबंध Essay on My School in Hindi”

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  • Hindi Grammar /

Mera School Essay in Hindi: कुछ ऐसे लिखें परीक्षा में मेरे स्कूल पर निबंध

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  • Updated on  
  • दिसम्बर 20, 2023

Mera School Essay In Hindi

विद्यार्थियों को अपने स्कूली जीवन में मेरा स्कूल विषय पर निबंध दिया जाता है। क्योंकि अपने स्वयं के स्कूल के बारे में लिखने से छात्रों को अपने विचारों, भावनाओं और अनुभवों को व्यक्त करने का मौका मिलता है। इससे वे स्कूल के माहौल के साथ अपने व्यक्तिगत जुड़ाव पर विचार करने के लिए भी प्रोत्साहित होते हैं। इसके साथ ही मेरा स्कूल विषय पर निबंध लेखन से विद्यार्थियों में संचार कौशल विकसित करने में मदद मिलती है। Mera School Essay in Hindi के बारे मैं जानने के लिए इस ब्लॉग को अंत तक पढ़ें। 

This Blog Includes:

मेरा स्कूल पर निबंध 100 शब्दों में, मेरा स्कूल पर निबंध 200 शब्दों में, मेरा स्कूल में पहली पसंद, मेरे स्कूल में मिलने वाली शिक्षा का स्तर, मेरे स्कूल पर 10 लाइन्स.

स्कूल हमें जिम्मेदार नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अच्छे शिक्षकों के द्वारा अक्सर अच्छे छात्र तैयार किए जाते हैं। मेरे भी उत्कृष्ट शिक्षक हैं और वे एकेडमिक्स के साथ खेल और अन्य गतिविधियों में भी हमारी सहायता करते हैं।  

ये शिक्षक हमारे स्कूल की नींव की तरह हैं, जो हमें मूल्यवान सबक देते हैं जिन्हें हम अपने दैनिक जीवन में उपयोग कर सकते हैं। स्कूल में हम न केवल गणित और विज्ञान जैसे विषयों के बारे में सीखते हैं बल्कि अपने दोस्तों के साथ सहयोग करने के बारे में भी सीखते हैं। 

हमारे स्कूल में विभिन्न विषयों के लिए अलग-अलग कक्षाएँ हैं, और पढ़ाई और पाठ्येतर गतिविधियों दोनों को समान महत्व दिया जाता है। यह हमें न केवल शैक्षणिक रूप से बल्कि एक जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में विकसित होने में मदद करता है।

यह भी पढ़ें : परीक्षा में ऐसे लिखें मेरा देश पर निबंध

Mera School Essay in Hindi 200 शब्दों में नीचे दिया गया है:

मेरा स्कूल एक जादुई जगह है जहाँ पढ़ना एक रोमांच जैसा लगता है। हर दिन, मैं अपने दोस्तों और शिक्षकों से मुस्कुराहट के साथ स्कूल में मिलता हूं। मेरे स्कूल की इमारत बहुत ऊँची है, सभी कक्षाएं रंगीन हैं, जहां पढ़ने में और भी अधिक आनंद आता है।

सुबह में, हम असेंबली एरिया में इकट्ठा होते हैं, जहां झंडा गर्व से फहराता है और हम उत्साह के साथ राष्ट्रगान गाते हैं।  कक्षाएँ खज़ाने की पेटी की तरह होती हैं, प्रत्येक में ज्ञान का एक नया टुकड़ा होता है जो खोजे जाने की प्रतीक्षा कर रहा होता है। शिक्षक जादूगरों की तरह हैं, जो संख्याओं, शब्दों और विज्ञान की दुनिया में हमारा मार्गदर्शन करते हैं।

ब्रेक के दौरान मेरे स्कूल का मैदान मौज-मस्ती और खेल की जगह बन जाता है। मित्र कहानियाँ साझा करते हैं और वातावरण हँसी से भर जाता है। कैफेटेरिया एक जादुई रसोईघर है जहां स्वादिष्ट सुगंध हवा में फैलती है और हम प्यार से भरे दोपहर के भोजन का आनंद लेते हैं।

मेरा स्कूल सिर्फ सीखने की जगह नहीं है; यह एक परिवार है। हम त्यौहार मनाते हैं, खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं और साथ मिलकर नाटक प्रस्तुत करते हैं।  दीवारें हमारी कलाकृति से सजी हैं और बुलेटिन बोर्ड हमारी उपलब्धियों की कहानी बताते हैं।

जैसे ही दिन के अंत में छुट्टी के समय घंटी बजती है, मैं ज्ञान से भरा बैग और यादों से भरा दिल लेकर निकल पड़ता हूँ।  मेरा स्कूल सिर्फ एक इमारत से कहीं अधिक है;  यह एक ऐसी जगह है जहां सपने उड़ान भरते हैं और दोस्ती बनती है।

मेरा स्कूल पर निबंध 500 शब्दों में

Mera School Essay in Hindi 500 शब्दों में नीचे दिया गया है:

शिक्षा हमारे जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो हमें दूसरों से अलग करती है और स्कूल इस आवश्यक यात्रा का शुरुआती बिंदु हैं। वे पहली जगह हैं जहां हम सीखना शुरू करते हैं, अपनी शिक्षा की नींव रखते हैं।  अपने स्कूल के बारे में इस निबंध में, मैं बताऊंगा कि मुझे यह क्यों पसंद है और इसने मुझे क्या महत्वपूर्ण सबक सिखाए हैं।

हम सभी ने स्कूल जाने की खुशी का अनुभव किया है, वहां बिताए हर पल को संजोकर रखा है क्योंकि वे हमारे जीवन की आधारशिला हैं। स्कूल वह जगह हैं जहां हमें शिक्षा की पहली चिंगारी मिलती है, हम न केवल शैक्षणिक विषयों को सीखते हैं बल्कि जीवन के बुनियादी सिद्धांतों को भी सीखते हैं, कैसे बढ़ें और फलें-फूलें। वे हमारे अंदर ऐसे मूल्य और सिद्धांत स्थापित करते हैं जो बच्चे के विकास का मूल आधार बनते हैं।

मेरा स्कूल मेरे लिए दूसरे घर की तरह है, जहाँ मैं अपना काफी समय बिताता हूँ। यह व्यक्तिगत विकास के लिए एक मंच प्रदान करता है और मेरे व्यक्तित्व को आकार देने में मदद करता है। मैं खुद को शहर के सबसे प्रतिष्ठित स्कूलों में से एक का हिस्सा होने के लिए भाग्यशाली मानता हूं, जिसमें कई चीज़ें हैं जो मेरे शैक्षिक अनुभव को बढ़ाती हैं। 

किंडरगार्टन से शुरू करके प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय और फिर बारहवीं कक्षा तक की हमारी यात्रा तक, स्कूल एक ऐसा स्थान बन जाता है जहां हम न केवल पढ़ते हैं बल्कि बढ़ते हैं, खुद को स्थापित करते हैं, मेलजोल बढ़ाते हैं, दूसरों से दोस्ती करते हैं, मदद की पेशकश करते हैं और प्यार का अनुभव करते हैं। यह एक निरंतर साथी की तरह है जो हमारे शुरुआती वर्षों से लेकर जीवन के अंत तक हमारे साथ रहता है। स्कूल में हम सभी खुशी से पढ़ते हैं, सभी दोस्त एक-दूसरे पर भरोसा करते हैं, खुशी के पल बांटते हैं और साथ मिलकर नए कार्यों और उत्सावों के लिए तैयार रहते हैं।

मेरा स्कूल आधुनिक शिक्षा को क्लासिक वास्तुकला के साथ खूबसूरती से जोड़ता है। पुरानी इमारतें न केवल देखने में आश्चर्यजनक हैं; वे नए उपकरणों से सजी हैं। मैं अपने स्कूल को शिक्षा के एक स्तंभ के रूप में देखता हूं, जो मुझे ज्ञान और नैतिक मूल्य दोनों प्रदान करती हैं।

किसी स्कूल की पहचान बनाने में शिक्षण स्टाफ का बहुत महत्व होता है। वे किसी भी शैक्षिक समुदाय की रीढ़ होते हैं, छात्रों को सीखने और समझने के लिए मार्गदर्शन करते हैं, अच्छी आदतें और मूल्य पैदा करते हैं।

मेरा स्कूल हमारे शैक्षणिक प्रदर्शन को बेहतर बनाने के साथ छात्रों के समग्र विकास को प्राथमिकता देता है। यह एक्स्ट्रा कैरिकुलर एक्टिविटीज के लिए एक सहायक वातावरण प्रदान करता है, यहां प्रत्येक छात्र पर ध्यान दिया जाता है, साथ ही यह आत्मविश्वास को बढ़ावा देता है।

जो चीज़ मेरे स्कूल को असाधारण बनाती है, वह इसकी मान्यता है कि हर एक जगह खास है। मेरे स्कूल में एक पुस्तकालय, कंप्यूटर कक्ष, खेल का मैदान और बास्केटबॉल कोर्ट जैसी सुविधाएं हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि छात्रों के पास उनकी ज़रूरत की हर चीज़ हो।

मेरे लिए, मेरा स्कूल एक शैक्षणिक संस्थान से बढ़कर है; यह मेरा दूसरा परिवार है। अद्भुत मित्रों, उत्कृष्ट शिक्षकों और स्कूल की यादों से भरपूर परिवार। मुझे अपने स्कूल से प्यार है क्योंकि यहीं मैं एक अच्छा नागरिक बनना और अपने लक्ष्यों को हासिल करना सीखता हूं।  यह एक ऐसी जगह है जहां दोस्ती बिना किसी निर्णय के बनाई जाती है और करीबी दोस्तों के साथ समय बिताना आरामदायक लगता है, चाहे स्थिति कोई भी हो।

यह भी पढ़ें : जानिए परीक्षाओं पूछे जाने वाले वन महोत्सव पर निबंध

मेरे स्कूल ने ऐसे पाठ पढ़ाए हैं जो इतने मूल्यवान हैं कि मैं उन्हें एक वाक्य में प्रस्तुत नहीं कर सकता। यहां की सीख अपूरणीय हैं, और मैं उनके लिए अविश्वसनीय रूप से आभारी हूं। उदाहरण के लिए दोस्तों के साथ चीज़ें बांटना और अन्य लोगों के प्रति प्रेम भावना। यहीं पर मैंने जानवरों की सहायता करना सीखा और बाद में इसी प्रेम के चलते मैने एक पालतू जानवर भी गोद लिया। 

स्कूल न केवल शैक्षणिक ज्ञान के बारे सिखाते हैं; 

मेरा स्कूल हमें एक ज़िम्मेदार व्यक्ति बनने के लिए भी प्रेरित करता है। मैने यहां बहुत सारे कौशल सीखे जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों चर्चा या घरेलू कार्यों का प्रबंधन करना, मुश्किल की परिस्थिति में धैर्य से काम करना ये सभी वास्तविक दुनिया में आवश्यक हैं। 

कार्यों में नए विचारों को अपनाना और ज़रूरत पड़ने पर उनका प्रयोग करना, जिससे मुझे ग्रेड से परे अपनी कार्य क्षमता के बारे में सिखाया गया।

विद्यार्थियों के प्रति समर्पित शिक्षकों की बदौलत स्कूल के माहौल में कलात्मक कौशल विकसित हुआ। इससे मुझे अंतर-स्कूल प्रतियोगिताओं में भाग लेने और पुरस्कार अर्जित करने का मौका मिला। सबसे अधिक महत्वपूर्ण में अपने स्कूल में असफलता का सामना और अपनी महत्वाकांक्षाओं को कभी न छोड़ने के बारे में सीखा। 

स्काउट्स और गाइड्स से लेकर खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों तक पाठ्येतर गतिविधियों ने मेरे स्कूल के अनुभव को समृद्ध किया। शिष्टाचार, चरित्र विकास और नैतिक शिक्षा पर हमारे प्रिंसिपल के दैनिक व्याख्यान ने मेरे मूल्यों को आकार दिया।  मैं आज जो भी हूं उसका श्रेय अपने स्कूल को देता हूं, इसे सर्वश्रेष्ठ संस्थान मानता हूं।

स्कूल का एक और महत्वपूर्ण सबक टीम वर्क है। यह अक्सर पहली जगह होती है जहां बच्चे अपने से भिन्न लोगों के साथ सहयोग करना सीखते हैं। यह समझना कि टीम की सफलता प्रत्येक व्यक्ति के योगदान पर निर्भर करती है, छात्रों में स्थापित एक बुनियादी सिद्धांत है, जो उन्हें टीम में मिलकर और व्यक्तिगत उपलब्धियों दोनों के लिए तैयार करता है।

संक्षेप में कहूं तो, एक प्रतिष्ठित स्कूल का हिस्सा बनना मेरे लिए एक जबरदस्त व्यक्तिगत विकास यात्रा रही है। मेरे चरित्र को ढालने और अमूल्य शिक्षाएँ प्रदान करने के लिए मैं अपने विद्यालय का बहुत आभारी हूँ। जो मित्रताएं बनीं और असाधारण शिक्षकों का मार्गदर्शन वे खजाने हैं जिन्हें मैं हमेशा संजो कर रखूंगा। मेरा लक्ष्य अपने स्कूल द्वारा स्थापित मूल्यों को बनाए रखना, जीवन में सफल होने का प्रयास करना और उस संस्थान को सम्मान दिलाना है जिसने आज मैं जो कुछ भी हूं उसे आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

Mera School Essay in Hindi पर 10 लाइन्स नीचे दी गई है:

  • मेरा स्कूल हमारे क्षेत्र में प्रसिद्ध है, स्थानीय लोगों के बीच अपनी लोकप्रियता और उच्च प्रतिष्ठा के लिए जाना जाता है।
  • स्कूल की इमारत विशाल है, हरियाली से सुसज्जित है, एक विशाल और सौंदर्य की दृष्टि से मनभावन वातावरण बनाती है।
  • एक विस्तृत खेल का मैदान विभिन्न बाहरी गतिविधियों और खेलों में शामिल होने के लिए पर्याप्त जगह प्रदान करता है।
  • शारीरिक शिक्षा सत्र साप्ताहिक रूप से आयोजित किए जाते हैं, जो हमारी समग्र फिटनेस और कल्याण में योगदान करते हैं।
  • स्कूल में अच्छे शिक्षक हैं जो एक सहायक और देखभाल करने वाला सीखने का माहौल बनाते हैं।
  • मैं स्कूल में कई दोस्तों के साथ आनंददायक पल साझा करता हूं, जहां हम एक साथ खेलते और पढ़ते हैं, जिससे सौहार्द की मजबूत भावना को बढ़ावा मिलता है।
  • स्कूल की व्यापक लाइब्रेरी पुस्तकों का विविध संग्रह प्रदान करती है, जो सीखने के लिए एक मूल्यवान संसाधन प्रदान करती है।
  • अच्छी तरह से सुसज्जित विज्ञान और सामाजिक विज्ञान प्रयोगशालाएँ हमारी व्यावहारिक समझ और प्रयोग को बढ़ाती हैं।
  • स्कूल सांस्कृतिक विविधता और एकता को बढ़ावा देते हुए कई राष्ट्रीय और धार्मिक त्योहारों को उत्साहपूर्वक मनाता है।
  • स्कूल में हर दिन एक खुशी है क्योंकि मैं नई चीजें सीखने और अपने ज्ञान का विस्तार करने के अवसर का उत्सुकता से स्वागत करता हूं।

स्कूल जीवन के ऐसे पाठ प्रदान करता है जो शिक्षा से परे है इसलिए प्रत्येक बच्चे के लिए स्कूल जाना महत्वपूर्ण है स्कूल हम सभी को शिक्षा के साथ ऐसा अनुभव प्रदान करता है, जो सामाजिक कौशल, पाठ्येतर गतिविधियाँ और मूल्यवान जीवन सबक भी प्रदान करता है।

स्कूल बुनियादी ज्ञान और कौशल प्रदान करता है, जिसमें बुनियादी शिक्षा और कला और सार्वजनिक बोलने जैसी प्रतिभाओं का विकास शामिल है। सबसे बढ़कर, यह छात्रों में अनुशासन पैदा करता है, भविष्य की सफलता के लिए उनके चरित्र को आकार देता है।

मेरा स्कूल अपनी उत्कृष्ट प्रतिष्ठा, विशाल और सुंदर परिसर, समर्पित शिक्षकों और समग्र विकास में योगदान देने वाली पाठ्येतर गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए जाना जाता है।

मेरे स्कूल में हर सप्ताह एक बार शारीरिक शिक्षा कक्षाएं आयोजित की जाती हैं, जिसमें समग्र फिटनेस और कल्याण बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया जाता है।

आशा हैं कि आपको इस ब्लाॅग में Mera School Essay in Hindi पर निबंध के बारे में पूरी जानकारी मिल गई होगी। इसी तरह के अन्य   निबंध से सम्बंधित ब्लॉग्स  पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बनें रहें।

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मेरा विद्यालय पर निबंध। my school essay in hindi

my school essay in hindi

विद्यालय जिसे हम लोग विद्या का मंदिर मानते है। विद्यालय को कोई पाठशाला कहता है तो कोई स्कूल कहता है। जीवन की अनगिनत यादों के साथ साथ सफलता के मुकाम पे पहुंचने का सफर स्कूल से ही होकर गुजरता है। आज आप इस पोस्ट में my school essay in hindi पढ़ेंगे। विद्यालय पर निबंध तो हमेशा ही स्कूल और कॉलेज में जरूर पुछा जाता है। इस हिंदी निबंध को आप essay on my school in hindi for class 1, 2, 3 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 तक के लिए थोड़े से संशोधन के साथ प्रयोग कर सकते है।

जोर जोर से बजती हुई घंटी, माँ का हाथ कस कर पकड़ा हुआ, बिकल कर रोते हुए कुछ ऐसे पहली बार स्कूल के अंदर गया। वो पहला दिन था जब मैने मेरे स्कूल को देखा। पहली बार मेरे साथ ऐसा हुआ था कि कोई बड़ी सी इमारत मुझे पसंद नही आ रही थी। क्योंकि चश्मा लगाई हुई मेडम मेरी माँ से मेरा हाथ छुड़ा कर अंदर की ओर ले जा रही थी। मैंने मेडम के हाथ मे काटा और माँ के पास भागने लगा। इतने में एक मेडम ने किटकैट दिखा कर कहा इसे कौन लेगा। वो टॉफी देख मेने माँ की तरफ देखा, माँ ने कहा जाओ जल्दी जाओ तुम्हारी पसंदीदा चॉकलेट लेलो।मुझे आज भी याद है कि उस दिन मुझे स्कूल भेजने के लिए बहुत झांसे दिए। कुछ इस तरह पहली बार मेने अपने विद्यालय में कदम रखा। आपकी ज़िंदगी मे भी ज़रूर कुछ ऐसे ही रौचक किस्से हुए होंगे जो आप याद करके अकेले में भी खूब हस्ते रहते होंगे।

प्रस्तावना-  जब हमें कुछ पता ही नही होता उस वक़्त हमारा दाखिल स्कूल में होता है।रोते- गाते, खेलते- कूदते, हम ऐसे पढ़ाव पर आ जाते है जब हमारे विद्यालय के हर कोने की तस्वीर हमारे दिमाग मे छप जाती है।रोते से हसना सीख जाना बस इतना ही हमारा स्कूल का सफर होता है। विद्यालय हमे हमारे सबसे निचले स्तर से शुरुवात करा कर एक ऐसे अनुभव की और ले जाता है जो आगे जीवन मे किसी अन्य चीज़ में प्राप्त नही होता।एक ऐसा अनुभव जो अमूल्य होता है और एक ऐसा इंसान  बनाता है जो देश का भविष्य होता है।कुछ यादें जो कहीं बयां करें भी तो कहा करे, ऐसी यादें दिल मे हमेशा पहले स्थान पर विद्यालय की होती है। हर बच्चे की पहली और आखरी पसन्द उसका विद्यालय ही होता है। जीवन के सबसे ना समझ क्षण हमने हमारे विद्यालय में ही बताए है। इसीलिए इससे ऊपर कोई बच्चा किसी संस्थान को अपने पूरे जीवन मे नही रख सकता।

विद्यालय का रंग और मेरे रंगीन मित्र-  मैने अपने विद्यालय रंग बचपन मे पीला समझा था। समझ के साथ कक्षा भी बढ़ी, फिर मुझे समझ आया कि ये तो कत्थई था। ज़्यादा बड़े तो नही बस पहली कक्षा में आकर मेरे जैसे और बच्चों पर मेरी नज़र गयी। ड्राइंग का पीरियड था, कुर्सी पर मेडम बैठ सब पर नज़र रखी हुई थी। मेरे पीछे की सीट पर एक लड़का खाली पेज पर बिना कुछ बनाये रंग भर रहा था। मुझे बहुत तेज़ हंसी आयी,वो भी मुझे हस्ता देख मुस्करा दिया। फिर मैने उसकी शीट पर फूल बनाया और उसने मेरी शिट पर रंग भरे। कुछ इस तरह मेरा जिगरी रंगीन यार बना। यूं  तो जिंदगी में हम हज़ारों लोगों से मिले होंगे लेकिन ऐसे रंगीन दोस्त हर बार नही मिलते।वो दोस्त मेरा पहला व सबसे करीबी दोस्त रहा।रोज़ लंच की घंटी बजती तो साथ खाना खाते। धीरे धीरे हमारा ग्रुप बनने लगा हमारे साथ आधे घण्टे के ब्रेक में 7-8 लड़के और खेलने लगे। पकड़म पार्टी, बर्फ पानी, आमछु बदमछु ये सारे नाम मेने वही पर पहली बार सुने और खेलना सीखे। कभी कभी सोचता हूं तो समझ आता है कि वो खेल ने ही  मेरी ज़िंदगी मे मुझे आज तक सबसे ज़्यादा खुशी दी। न दुनिया की कोई  रीत थीं, न छल- न कपट, न कोई भेद था। धीरे धीरे दोस्ती गहरी होती चली गयी। जब भी सोचता हूं की मेरे स्कूल ने मुझे क्या दिया तो सब छोड़ सबसे पहले ज़ुबान पर आता है हीरे, मेरे स्कूल ने मुझे वो अनमोल रत्न दिए जो, खुशी में शामिल हो न हो पर मेरे दुख में मेरी ढाल बनकर खड़े रहते है। मेरे दोस्त है जो मुझे हर तकलीफ से दूर रखते है। 

स्कूल लाइब्रेरी, किताबें और पीरियड से रिश्ता- जब तक किताबों के सागर में डूबते मेरा दोस्त साइड में प्रार्थना करता , है भगवान आज हां बस आज साइंस का पीरियड खत्म हो जाये। और ऐसे ही प्रार्थना वो रोज़ हर पीरियड में करता था। आप तो समझ ही गए होंगे कि किताबों में से पढ़ने से ज़्यादा, पीरियड खत्म होने की घंटी का इंतज़ार करते थे। कुछ भी कहो सब बच्चों को लाइब्रेरी पीरियड का बहुत इंतज़ार रहता था। बेशक वहां भी किताबें थी। पर वहां हमारे टीचर के अनुसार कोई भी किताब उठा कर पढ़ सकते थे। लेकिन हमारे अनुसार कोई भी किताब उठा कर बस उसके चित्र देख कर रखना होता था। फिर क्या था जिस भी किताब में शेर, चीतह, खरगोश नज़र आते वो उठा लेते। और पूरे पीरियड बस किताबों के पन्ने पलट कर वही चित्रों को निहारते।

किताबों के दोहों से बड़ी सीख मिलती थी। कैसे परोपकार करना है, कैसे दुसरो की सेवा करना है, कैसे दुसरो के लिए जीवन को जीना है। सब बच्चें किताब को हिंदी पीरियड में बड़े ध्यान से पढ़ते। एक अच्छे मनुष्य की पहचान क्या होती है ये मैने उन्ही किताबों से सीखा। खाली दिमाग मे जो अंकुरित करो वही परिणाम स्वरूप सामने आता है। अपने विद्यालय से जीवन जीने का सही तरीका सीखा। वो पाठ ने मेरे जीवन के पाठ में विशेष किरदार निभाया। अच्छा इंसान बनना चाहिए ये तो सब बताते है, पर अच्छा इंसान कैसे बनना है ये मेरे विद्यालय व मेरी किताबों ने सिखाया। जाने अनजाने हमने जीवन के महत्वपुर्ण पढ़ावो को पार करने की तैयारी करली थी जो हमे जीवन मे आगे बाधा बनकर उभरने वाले थे।

विद्यालय के शिक्षक-   नर्सरी से लेकर बारहवीं तक जिस अभिन्न व्यक्ति का साथ था वो थे हमारे शिक्षक। जिस दिन चलना सीखा उस दिन से मेरे जीवन के 18 साल तक उन्होंने हमे चलाया नही चलने का मार्ग भी  दिखाया। हर छोटे-छोटे झगड़े को सुलझाया और हर बार भगवान के समान माफ भी किया।विद्यालय में शिक्षक डरावने लगते थे। पर तब हम ये नही जानते थे कि इनसे कोमल इस दुनिया मे किसी ओर का हृदय नही होता। हर विषय के अलग अलग शिक्षक होते थे। वो हमारे सारे बहानों को जानते थे जो हम होमवर्क ना करके आने पर बनाते थे। उस दिन मुझे समझ आया कि सब समझ कर भी ना समझ बन जाना भी कितना विशेष प्रेम होता है। जो वो हम बच्चों से करते थे। गलती करने पर कई बार डांट भी लगते थे। पर उनका उद्देश्य कभी डांट कर नीचा दिखाने का नही बल्कि ऊपर उठाने का होता था। शिक्षा और शिक्षक का संबंध शायद एक बार को टूट सकता है। पर शिक्षक और बच्चों का संबंध कभी नही टूटता। शिक्षक बच्चों में शिक्षा का संचार कुछ ही सालों में आजीवन के लिए कर देता है।अनाराम से लेकर जीवन मे अलार्म तक का सफर हमे शिक्षक तय कराते हैं। वे सीखते है कि कैसे अपने लक्ष्य के प्रति आगे बढ़ते रहना है, और कैसे जीवन मे अनुशाषित रहना है।

विद्यालय का प्रांगण व आखरी साल- खाली दिमाग में धीरे धीरे अक्ल आने ही लगी थी, फिर बस हमारे विद्यालय में रहने का आखरी साल आगया।कैसे सालो की बिताई यादों को कुछ क्षण में समेट पाते। फेयरवेल लेने जब मैदान में खड़े थे तब आखरी बार अपने स्कूल को निहार रहे थे।तब लगा कि कितना बड़ा है मेरा विद्यालय। आज तक विद्यालय को देखने की फुरसत ही कहा मिली थी।अपने दोस्तों के साथ खेलने, टीचर को समझने सुनने के अलावा, कभी ध्यान ही नही गया।  स्कूल के पहले दिन जब रोते हुए आये थे तब ध्यान गया था। और अब जब रोते हुए जा रहे है तब ध्यान जा रहा है। जितना डरावना पहले दिन लगा था उससे कई ज़्यादा डरावना आज लगा। फर्क इतना है की उस वक़्त विद्यालय में आने का मन नही था , ” और आज जाने का नही है”। सारी यादें  वही पुराने बस्ते में भर कर ले जाते है और आशा करते है कि काश फिर से बच्चे बन पाए। काश फिर ये पल दोबारा से जी पाए।

नम आंखों में आज मैने मेरे पूरे विद्यालय को देखा है। जैसे हर साल विद्यालय की गोद मे खेले बच्चे  जाते है, विद्यालय की आंखें भी नम नज़र आती है। 

उपसंहार- शिक्षक को कभी मैने उनका दुख जताते नही देखा। जिन बच्चों को उनने बचपन से देखा है, और जितनी भी सीख दी है। आज से सब बच्चे उन्हें अपने जीवन मे अमल करने जा रहे थे। बेशक उनका हृदय नम था। पर उन्होंने हमें आशीर्वाद देकर विदा किया। विद्यालय सभी के जीवन का ऐसा अंग होता है जो भुलाए नही भुला जाता।

शिक्षा का कर्ज उतारना अभी बांकी है,  ऐ स्कूल वापिस बुला ले हमे, हमारा बचपन अभी भी बाकी हैं,  हमारा बचपन अभी बांकी है…!!

हमें आशा है आपको my school essay पसंद आया होगा। आप इस निबंध को essay on my school के रूप में भी प्रयोग कर सकते है। इस निबंध को paragraph on my school के लिए भी प्रयोग कर सकते है ।

मेरा विद्यालय पर निबंध, लेख, 10 लाइन

विद्यालय (पाठशाला ) एक ऐसा स्थान है जो विद्या के प्रतीक के रूप में काम करता है, अर्थात् यह वह स्थान होता है जहाँ ज्ञान(विधा) की प्राप्ति होती है। हमारे संस्कृति में विद्या को देवी के रूप में माना जाता है और विद्यालय को ‘मंदिर’ के समान महत्वपूर्ण माना गया है। आज हम विद्यालय यानि पाठशाला पर निबंध, लेख, 10 लाइन, पर विस्तार से पढ़ेंगे।

Also Read: विद्यालय का महत्व पर निबंध-पाठशाला का महत्व पर निबंध // विद्यालय का वार्षिकोत्सव पर निबंध // मेरे विद्यालय में पारितोषिक वितरण समारोह // शिक्षा में चुनौतियों पर निबंध //

मेरा विद्यालय पर निबंध, लेख, 10 लाइन 1

विद्यालय पर निबंध (200 शब्दों में)

मेरे विद्यालय का नाम अर्पण पब्लिक स्कूल है। यह मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और मेरी शिक्षा की यात्रा का संवर्गस्थान है। यहाँ पर हमें न केवल पढ़ाई का मौका मिलता है, बल्कि हम खेल, कला, संगीत आदि में भी विकसित होते हैं।

हमारे विद्यालय में प्रमुख ध्येय है कि हर छात्र को सम्पूर्ण विकास मिले। यहाँ के उच्च प्रतिष्ठान वाले अध्यापक हमें विभिन्न विषयों में पढ़ाते हैं और हमें नए ज्ञान का संचय करने में मदद करते हैं।

विद्यालय में सभी छात्र एक परिवार की भावना से जुड़े रहते हैं। हम उनके साथ समय बिताकर अच्छे दोस्त बनाते हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं।

हमारे विद्यालय में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेल-कूद प्रतियोगिताएं और शिक्षा से जुड़े अन्य गतिविधियाँ भी आयोजित की जाती हैं।

मेरे विद्यालय के प्रिंसिपल और शिक्षक हमें न केवल शिक्षा देते हैं, बल्कि वे हमें अच्छे मानव और सामाजिक नागरिक बनने में भी मार्गदर्शन करते हैं।

आखिर में, मेरे विद्यालय ने मुझे ज्ञान, सामर्थ्य और सजीव शिक्षा का अद्भुत साधना स्तर प्रदान किया है। यहाँ के सुखद और शिक्षाप्रद वातावरण में मेरी पूरी शिक्षा की यात्रा अद्वितीय और प्रेरणास्त्रोत रही है।

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विद्यालय पर निबंध 300 शब्दों में-vidyalaya par nibandh

रुपरेखा : प्रस्तावना – विद्यालय की परिभाषा – विद्यालय की भूमिका – विद्यालय की परिकल्पना – विद्यालय के प्रकार – विद्यालय की विशेषता – उपसंहार।

प्रस्तावना : विद्यालय, जिसे हम सिखने और ज्ञान प्राप्त करने के लिए जाते हैं, हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहाँ पर हम न केवल पढ़ाई करते हैं, बल्कि साथ ही खेल, कला, और विकास के अन्य क्षेत्रों में भी सीख प्राप्त करते हैं।

विद्यालय की परिभाषा: विद्यालय एक स्थान होता है जहाँ छात्र अपने शिक्षा का अध्ययन करते हैं। यहाँ पर हमें अध्यापक मिलते हैं जो हमें विभिन्न विषयों में पढ़ाते हैं और हमारे ज्ञान को विकसित करते हैं।

विद्यालय की भूमिका: विद्यालय छात्रों को न केवल शिक्षा प्रदान करता है, बल्कि उन्हें अच्छे मानवीय मूल्यों, नैतिकता, और समर्पण की शिक्षा भी देता है। यहाँ पर हम जीवन के महत्वपूर्ण सिक्के सीखते हैं जो हमें अच्छे नागरिक बनने में मदद करते हैं।

विद्यालय की परिकल्पना: विद्यालय की परिकल्पना एक सुरम्य और संवेदनशीलता से भरपूर स्थान का चित्रण करती है, जहाँ छात्र न केवल पढ़ाई करते हैं, बल्कि खेल, कला, और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी भाग लेते हैं।

विद्यालय के प्रकार : विद्यालय कई प्रकार के होते हैं, जैसे सरकारी विद्यालय, निजी विद्यालय, आदि। इनमें हर एक का अपना विशिष्टता होता है और यह छात्रों के विकास में योगदान करते हैं।

विद्यालय की विशेषता: विद्यालय एक ऐसी जगह होती है जहाँ हमें अच्छे से सीखने का मौका मिलता है और हम नए दोस्त भी बनाते हैं। यहाँ पर हम जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों को समझते हैं और अपने आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं।

उपसंहार: विद्यालय हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो हमें न केवल ज्ञान प्रदान करता है, बल्कि हमारे व्यक्तिगत और सामाजिक विकास में भी मदद करता है। यहाँ पर हम सिखते हैं कि कैसे जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है और समृद्धि प्राप्त की जा सकती है।”

मेरा विद्यालय पर निबंध, लेख, 10 लाइन 2

मेरा विद्यालय पर निबंध- Essay on My School in Hindi.

विद्यालय यानी विद्या और आलय, अर्थात शिक्षा का मंदिर। जहाँ पर हर रोज़ लाखो बच्चे विद्या अर्जन करने जाते है। मेरे विद्यालय का नाम केंद्रीय विद्यालय है। यह असम की पहाड़ियों के बीच स्थित है। मेरा विद्यालय काफी बड़ा है और विश्तृत रूप से फैला हुआ है। मेरे विद्यालय में एक से बारहवीं तक की कक्ष्याएं है। यहाँ विद्यालय का परिवेश शांत और शिक्षा की उत्तम व्यवस्था है। यहाँ हर कक्षा के 4 अनुभाग यानी सेक्शंस है। यहाँ के प्रधानाध्यापक अनुशासन प्रिय है। हमारा विद्यालय तीन मंजिला इमारत है। यहाँ विद्यालय में तक़रीबन 50 कमरे है। कमरे में गुणवत्ता पूर्वक कुर्सियां, पंखे, स्मार्टबोर्ड और श्यामपट्ट का इंतज़ाम है।

यहाँ विद्यालय में विशाल वातानुकूलित पुस्तकालय है जहाँ हर विषय के पुस्तक उपलब्ध है। यहाँ बच्चे दैनिक अखबार पढ़ सकते है। विद्यालय में कंप्यूटर विज्ञान के प्रक्टिकल्स के लिए विशाल कंप्यूटर का कमरा है। यहाँ विद्यार्थी कंप्यूटर क्लास में कंप्यूटर को शिक्षक के निरीक्षण में चला सकते है। यहाँ विज्ञान के हर क्षेत्र जैसे रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान और जीव विज्ञान के अलग और भव्य प्रयोगशाला है। यहाँ खेलकूद के लिए अलग कमरा है। जहाँ फूटबाल, क्रिकेट, और वॉली बॉल से सम्बंधित सारे ज़रूरत की चीज़ें मौजूद है। लेकिन अध्यापकों के निरिक्षण में इनका उपयोग करना अनिवार्य है।

यहाँ विद्यालय में संगीत और नृत्य के लिए अलग कमरा है जहाँ हर प्रकार के वाद्य यन्त्र मौजूद है। यहाँ विद्यालय में खेलने के लिए विशालकाय मैदान है और छायादार पेड़ है। यहाँ अतिसुन्दर उद्यान है जहाँ हर प्रकार के फूल लगे हुए है। हमारे विद्यालय में शिक्षण ग्रहण करने हेतु विद्वान और सुशिक्षित अध्यापक और अध्यापिका है। यहाँ हमेशा कड़े अनुशासन का पालन किया जाता है। यहाँ हर रोज सुबह की प्राथना सभा में प्रतिज्ञा, समाचार, सोच, और भाषण जैसे कार्यक्रम आयोजित किये जाते है। प्राथना सभा में हर विद्यार्थी उत्सुकता से भाग लेता है। उसके बाद हमारी कक्ष्याएं प्रारम्भ हो जाती है।

यहाँ हर विषय का अध्ययन बहुत ही रोचक होता है। शिक्षक गण हमे बड़े चाव से पढ़ाते है और कई नए पद्धतियों और उपकरण का प्रयोग करते है ताकि विद्यार्थियों को अच्छे से विषय का ज्ञान हो। यहाँ हर एक कालखंड 45 मिनट का होता है। विद्यालय में शुद्ध और स्वच्छ पीने का पानी उपलब्ध है और स्वच्छ शौचालय की व्यवस्था है। यहाँ अगर किसी विद्यार्थी को कुछ विषय में समझ न आये तो उपचारात्मक कक्ष्याओं की सहायता ले सकते है। यहाँ विद्यालय में कई तरह की सह पाठ्यक्रम प्रतियोगिता आयोजित की जाती है जैसे वाद-विवाद, भाषण, सुलेख लेखन, कविता गायन जैसे प्रतियोगिता आयोजित की जाती है ताकि विद्यार्थी हर क्षेत्र में सक्ष्म प्रयास और उन्नति करे। इसके आलावा नृत्य, संगीत, अंताक्षरी और नाटक जैसे मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित किये जाते है।

यहाँ विद्यालय में हर साल भव्य वार्षिक समारोह का आयोजन किया जाता है। इस समारोह विद्यार्थियों को उनके क्षेत्र में उत्तम कार्य करने के लिए पुरस्कार दिए जाते हैं। यहाँ हर साल मुख अतिथि छात्रों के लिए प्रेरणास्रोत बनकर आते है। नृत्य, नाटक, प्रधानाचार्य महोदय के ज्ञान वर्धक भाषण सुनने और देखने का सुअवसर प्राप्त होता है। विद्यालय में अध्यापको के लिए सुसज्ज्ति स्टाफ कक्ष है। यहाँ शिक्षकगण विद्यार्थिओं की उत्तरपुस्तिकाओं का निरीक्षण कार्य करते है और साथ ही विद्यार्थिओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए उत्तम निर्णय लेते है। नजदीक में प्रधानचार्य महोदय का कक्ष है जो काफी विशाल और भव्य है।

स्कूल की इमारत और छात्रों  की सुरक्षा के लिए बाहर सुरक्षा कर्मी हमेशा तैनात रहते है। स्कूल में हमेशा अनुशासन का अनुकरण किया जाता है। यहाँ विद्यालय के आंगन और सभी कक्षाओं की रोज़ सफाई की जाती है। यहाँ विद्यालय के आँगन के पास जो बगीचा है वहां विभिन्न प्रकार के छायादार पेड़ है इसलिए विद्यालय का एक सुन्दर दृश्य स्थापित हो जाता है। यहाँ बच्चे हर साल दसवीं और बारहवीं में अच्छा शैक्षिक प्रदर्शन करते है। जिसके कारण जिले में हमारा विद्यालय अत्यंत लोकप्रिय है। हमारे विद्यालय में पुस्तकालय का रूप में एक ज्ञान का महसागर है। यहाँ हर विषय और क्षेत्र से सम्बंधित किताबें पायी जाती है। जो बच्चे महंगे किताबे नहीं खरीद सकते है यहाँ पुस्तकालय में आकर ज्ञान अर्जित करते है।

हर प्रकार के दिवस जैसे शिक्षक दिवस , स्वतंत्रता दिवस सुअवसर मनाये जाते है और कई प्रकार सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

विद्यालय विद्या का मंदिर है जहाँ बच्चे हर प्रकार का ज्ञान प्राप्त करने आते है। ज़िन्दगी में विद्यालय का महत्व अतुलनीय है। ज़िन्दगी में हर विद्यार्थी के बेहतरीन दिन यहाँ बितते है जिसे आजीवन वह याद करते है। विद्यालय का सहयोगमय वातावरण और अपार शिक्षा भविष्य में विद्यार्थिओं को आत्मनिर्भर बनाता है। यहीं से शिक्षा पाकर विद्यार्थी ज़िन्दगी में बहुत कुछ कर दिखाते है। हमे अपने विद्यालय पर गर्व है।

मेरा विद्यालय 10 लाइन-vidyalay per 10 line

  • मेरा विद्यालय मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहाँ हमें शिक्षा के साथ-साथ खेल, कला और सामाजिक गतिविधियों का भी मौका मिलता है।
  • हमारे विद्यालय में अध्यापक हमें विभिन्न विषयों में पढ़ाते हैं और हमारे ज्ञान को विकसित करते हैं।
  • विद्यालय में हम नए दोस्त बनाते हैं और उनके साथ समय बिताते हैं।
  • हमारे विद्यालय में विभिन्न प्रतियोगिताएँ और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं।
  • विद्यालय में हमें नैतिक मूल्यों की शिक्षा दी जाती है और हमें समाज में उपयोगी नागरिक बनाने के लिए प्रेरित किया जाता है।
  • हमारे विद्यालय के प्रिंसिपल और शिक्षक हमारे मार्गदर्शक होते हैं और हमें सही दिशा में आगे बढ़ने में मदद करते हैं।
  • मेरे विद्यालय का वातावरण सुरक्षित और प्रेरणास्त्रोत होता है, जो हमें सीखने के लिए परिपूर्ण माहौल प्रदान करता है।
  • विद्यालय में हमें सिखाया जाता है कि कैसे अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए मेहनत करें और संघर्ष का सामना करें।
  • मेरे विद्यालय ने मेरी प्रौद्योगिकी, सामाजिक और मानसिक दृष्टि को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • मेरा विद्यालय मेरे जीवन की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है जो मुझे नए दर्शनियों की ओर अग्रसर करने में मदद करता है।

मेरा विद्यालय पर निबंध, लेख, 10 लाइन 3

#सम्बंधित: Hindi Essay, Hindi Paragraph, हिंदी निबंध।

  • विद्यालय का वार्षिकोत्सव पर निबंध
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मेरा स्कूल पर निबंध – My school essay in Hindi (1000 Words)

मेरा स्कूल पर निबंध (My school essay in Hindi): जीवन में हमारा दूसरा घर स्कूल होता है. स्कूल में ही हम सब जीवन के मुख्य उद्देश्य को समझते है. और स्कूल में हमे कभी न कभी हमारे स्कूल के बारे में लिखने का मौका मिलता है. और ये लिखने के मौके को हम सिर्फ निबंध में ही व्यक्त कर सकते हैं. इसलिए में आज आपके लिए लेकर आया हूँ मेरा विद्यालय पर निबंध (Essay on my school in Hindi).

मेरा स्कूल पर निबंध – My school essay in Hindi

ईश्वर के पास जितने भी संसाधन है, मानव संसाधन उन सभी में सर्वश्रेष्ठ हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि मानव संसाधनों के समुचित विकास के साथ, अन्य सभी प्राकृतिक संसाधनों का विकास संभव होगा. इस मानव संसाधन के विकास के लिए स्कूल कई औपचारिक साधनों में से एक हैं. हमारे देश में कई तरह के स्कूल हैं, जैसे प्राथमिक स्कूल और हाई स्कूल. मैं जिस स्कूल में जाता हूं वह हाई स्कूल है. उसका नाम माध्यमिक बोर्ड हाई स्कूल है. यहाँ 6 वीं से 10 वीं कक्षा तक की शिक्षा देता है.

हमारा स्कूल कटक सहर के बजरकबती रोड के पास स्थित है. मौजूदा बजरकबती रोड रानीहाट चौक को डोलमुंडई चौक से जोड़ता है. पश्चिम में फ्रेंड्स कॉलोनी है, उत्तर में रानीहाट गोपाल साही है और दक्षिण में ओडिशा माध्यमिक शिक्षा समिति का कार्यालय है.

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कक्षाओं और छात्रों की संख्या

हमारा स्कूल में 6 वीं से 10 वीं कक्षा तक शिक्षा प्रदान किया जाता है. 6 वीं से 7 वीं कक्षा में 3 विभाग और अन्य कक्षाओं में 4 विभाग है. स्कूल के अठारह विभागों में लगभग 1,000 छात्रों पढ़ते हैं. यहाँ का पाठ्यक्रम का अनुसरण माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा किया जाता है. उच्च वर्ग साहित्य, अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, कला, शारीरिक शिक्षा और काम का अनुभव के बारे में शिक्षा दिया जाता है.

स्कूल का घर

हमारा स्कूल तीन मंजिला इमारत है. महल में छोटे बड़े 12 कमरे हैं. इसमें शिक्षकों के विश्राम कक्ष, पुस्तकालय, प्रधानाध्यापक कार्यालय, विद्यालय के कार्यालय भवन, 10 वीं कक्षा के 4 विभाग, हिंदी और संस्कृत के लिए एक अलग कक्षा है. दूसरी मंजिल पर एक खेल शिक्षक का कमरा, राष्ट्रीय युद्ध शैक्षिक बलों के लिए एक विशेष कमरा और एक हवाई क्षेत्र, एक प्रयोगशाला, विज्ञान वर्ग के लिए एक गैलरी और भूगोल के लिए एक विशेष कमरा है. इस दूसरी मंजिल पर 8 वीं और 9 वीं कक्षा में से प्रत्येक में 4 विभाग भी होते हैं. इसी तरह, तीसरी मंजिल में 6 वीं और 7 वीं कक्षा है. इस मंजिल पर एक छोटा हॉल या मीटिंग रूम भी है. यद्यपि यह हमारे विद्यालय के सभी छात्रों के लिए पर्याप्त नहीं है, फिर भी यहाँ छोटी बैठकें करना संभव है.

स्थापना और प्रबंधन

हमारे स्कूल की स्थापना 3 अगस्त, 1959 को माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा की गई थी. तब से, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड स्कूल की इमारत का विस्तार कर रहा है, शिक्षकों की आवश्यक संख्या को काम पर रखने के साथ-साथ सभी स्कूल खर्चों को कवर करता है. स्कूल में अधिकारियों को सलाह देने के लिए एक प्रबंधन समिति है. माध्यमिक शिक्षा परिषद के संपादक, स्कूल प्रिंसिपल, शिक्षक प्रतिनिधि और 2 निर्वाचित माता-पिता संचालन समिति के सदस्य हैं. समिति वर्ष के विभिन्न समयों में होती है और सदस्य स्कूल के बारे में सोची समझी सलाह देते हैं.

शिक्षक और अन्य कर्मचारी

हमारे विद्यालय के प्रधानाध्यापक श्री राम शर्मा. उन्होंने मेधावी शिक्षक के रूप में राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार जीते हैं. उनके अलावा, 35 अन्य प्रशिक्षित शिक्षक, 13 4th ग्रेड के कर्मचारी और 2 कार्यालय सहायक यहां काम कर रहे हैं. दो शिक्षकों को राज्यपाल ने मेधावी शिक्षकों के रूप में सम्मानित किया है.

स्कूल में गणेश पूजा, सरस्वती पूजा, गुरु दिवस, पुरस्कार समारोह, स्थापना दिवस, स्वतंत्रता दिवस, बाल दिवस, जन राज्य दिवस आदि मनाया जाता है. हमारे स्कूल के छात्र कटक शहर और राज्य के विभिन्न हिस्सों में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेते रहे हैं और पुरस्कार और प्रमाण पत्र जीतने के साथ-साथ स्कूल की प्रतिष्ठा भी बढ़ाते हैं.

बगीचा                                

हमारे स्कूल में एक सुंदर फूलों का बगीचा है. बगीचे के अंदर महात्मा गांधी की मूर्ति है. उद्यान को 8 भाग में विभाजित किया गया है. प्रत्येक कियारी में फ्लैट कालीन की तरह हरी घास और कियारी के चारों ओर फूलों की सुंदर बाड़ है. ये पेड़ बहुत सुंदर लगते हैं क्योंकि वे एक निश्चित ऊंचाई तक कट जाते हैं. हरी घास और उसके चारों ओर मौसमी फूलों की लाइनिंग बगीचे की सुंदरता को कई गुना बढ़ा देती है. यद्यपि एक शिक्षक बगीचे का प्रभारी है, लेकिन स्कूल के अन्य सभी शिक्षक बगीचे के समग्र सुधार में योगदान करते हैं. छात्रों नियमित रूप से समय पर शिक्षक की देखरेख में बगीचे में काम करते हैं. सभी के प्रयासों के कारण, बगीचा बहुत आकर्षक हो गया है.

हमारे स्कूल में एक पुस्तकालय है. इसमें लगभग 10,000 पुस्तकें हैं. एक शिक्षक इसके प्रबंधन का प्रभारी होते हैं. पुस्तकालय के लिए एक निर्दिष्ट समय है. शिक्षक कक्षा की पाठ्यपुस्तकें और अन्य सहायक पुस्तकें पुस्तकालय से लेते हैं. कुछ शिक्षक और छात्र स्कूल के बाद पुस्तकालय में रहते हैं और स्कूल में आने वाली विभिन्न पुस्तकों और समाचार पत्रों और पत्रिकाओं को पढ़ते हैं. जैसा कि हमारा पुस्तकालय एक अच्छी तरह से संचालित पुस्तकालय है, यह शिक्षकों और छात्रों के ज्ञान को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

हमारे स्कूल में एक छोटा सा खेल का मैदान है. शनिवार को यहां सामूहिक अभ्यास आयोजित किए जाते हैं. उत्साही छात्र खेल शिक्षक की देखरेख में स्कूल के काम और अन्य छुट्टियों के बाद खेल का अभ्यास करते हैं. छात्र शहर और राज्य में आयोजित विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेते रहे हैं.

स्कूल के छात्रों निर्दिष्ट वस्त्र पहनते हैं. लड़कों  गहरे नीले रंग की पैंट और सफेद हाफ शर्ट पहनते हैं  और लड़कियों आसमानी नीले रंग की फ्रॉक पहनते हैं. स्कूल-नामांकित पदक छात्रों द्वारा उपयोग किए जाते हैं. इससे छात्रों में स्कूल के प्रति जुनून का पता चलता है.

परीक्षा परिणाम

हमारे स्कूल के परीक्षा परिणाम बहुत संतोषजनक हैं. हर साल, सैकड़ों छात्र प्रथम श्रेणी से पास होते हैं. प्रथम श्रेणी में पास होने वाले छात्रों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है और द्वितीय श्रेणी में पास होने वाले छात्रों की संख्या धीरे-धीरे कम हो रही है. हमारे स्कूल में शिक्षक नियमित कक्षाओं में पढ़ाते हैं. लगभग हर वर्ष, इस विद्यालय के छात्र विद्यालय की प्रतिष्ठा को बढ़ाकर विद्यालय में स्थान प्राप्त करते हैं.

हमारा स्कूल अन्य स्कूलों जितना पुराना नहीं है. इसलिए इसकी कोई समृद्ध परंपरा नहीं है. छात्रों और शिक्षकों के प्रयासों और माता-पिता के सक्रिय सहयोग के लिए धन्यवाद, स्कूल धीरे-धीरे सुधार कर रहा है और एक उज्जवल परंपरा का निर्माण कर रहा है. मुझे अपने स्कूल पर गर्व है. यदि स्कूल का प्रत्येक छात्र इतना गर्व महसूस करता है और समर्पण के साथ काम करता है, तो स्कूल पूरे राज्य में आदर्श स्कूलों में से एक बन सकता है.

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ये था मेरा स्कूल पर निबंध (Essay on my school in Hindi) . अगर आपको कभी अपने स्कूल के ऊपर निबंध लिखने के लिए कहा जाता है, तो आप ऊपर दिए गए निबंध को अनुसरण कर के लिख सकते हो.

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मेरा स्कूल पर निबंध (My School Essay In Hindi)

मेरा स्कूल पर निबंध (My School Essay In Hindi), मेरी पाठशाला पर निबंध

आज के इस लेख में हम मेरा स्कूल विषय  पर निबंध (Essay On My School In Hindi) लिखेंगे। मेरा स्कूल विषय पर लिखा यह निबंध बच्चो और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है।

मेरा स्कूल विषय पर लिखा हुआ यह निबंध (Essay On My School In Hindi) आप अपने स्कूल या फिर कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल कर सकते है। आपको हमारे इस वेबसाइट पर और भी कही विषयो पर हिंदी में निबंध मिलेंगे, जिन्हे आप पढ़ सकते है।

Table of Contents

मेरा स्कूल पर निबंध ( My School Essay In Hindi)

प्रस्तावना 

घर के बाद एक बच्चे के जिंदगी में पहला बदलाव स्कूल होता है। स्कूल के जरिए ही एक बच्चा पहली बार दुनियाँ से सामना करता है और बहुत कुछ सीखता है। इसलिए ऐसा कह सकते हैं कि किसी भी बच्चे के जीवन मे स्कूल का बहुत अधिक महत्व होता है।

यह महत्व सिर्फ पढ़ाई की दृष्टि से नही बल्कि एक बच्चे के पूरे व्यक्तित्व विकास में भी बहुत अहम होता है। ठीक इसी तरह मेरे जीवन मे भी स्कूल का महत्व रहा है। मेरे स्कूल का नाम सरस्वती शिशु मंदिर है।

मेरे स्कूल की गिनती शहर के कुछ प्रसिद्ध स्कूलों में होती है, इस वजह से हर विद्यार्थी यहां से पढ़ने के लिए लालायित रहता है। लेकिन यहाँ आना इतना आसान नही है। मेरे स्कूल में कोई भी विद्यार्थी तभी प्रवेश पा सकता है जब वह प्रवेश परीक्षा को पास कर पाएगा।

हर वर्ष हमारे स्कूल में एक प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है, जिसको देने के लिए शहर और गाँव के विद्यार्थी आते हैं। परीक्षा के बाद इन लोगों को नंबर दिए जाते हैं, जिसके आधार पर एक मेरिट लिस्ट बनाई जाती है।

मेरिट लिस्ट के आधार पर ही कोई भी यहां पर प्रवेश पा सकता है। जिसका नाम उंस मेरिट लिस्ट में होगा उसका प्रवेश सुनिश्चचित हो जाता है। लेकिन जिनका नाम नही है उन्हें प्रवेश नही मिल पाएगा। हालांकि वह दूसरी बार परीक्षा में जरूर बैठ सकते हैं, इसके लिए उन पर कोई पाबंदी नही है।

स्कूल का परिसर

हमारे स्कूल का परिसर बहुत ही भव्य है, क्योंकि यहां कक्षा 1 से लेकर 12 वी तक कि कक्षाएं लगती है। कक्षा 1 से लेकर 10 वी तक कि कक्षाओं के लिए एक अलग परिसर है, जबकि कक्षा 11 वी और 12 वी के लिए दूसरा परिसर बनाया गया है।

इन दोनों परिसरों के बीच दो बड़े खेल के मैदान हैं जिसमें एक तरफ 11, 12 वी के विद्यार्थी होते हैं ,जबकि दूसरे मैदान में 10वी और बाकी कक्षा के बच्चे होते हैं। इन दोनों मैदानों के बीचो बीच एक सड़क बनी हुई है।

जहां से गुजर कर हमारी स्कूल बस जाती है। हमारे स्कूल में कुल 3 स्कूल बस हैं। कई लोग सायकल से तो कुछ लोग बाइक से भी स्कूल आते हैं। मैं फिलहाल बस से ही स्कूल आता हूँ। स्कूल में 2 मंजिला इमारत बनी हुई है। जिसमें निचली मंजिला में 11वी की कक्षा लगती है।

और वही ऊपरी मंजिला में 12 की कक्षा लगती है, जबकि सबसे ऊपर वाले मंजिल में प्रार्थनाएं होती हैं। स्कूल का प्रार्थना कक्ष इतना बड़ा बना हुआ है, कि उसमें 350 बच्चे आसानी से बैठ सकते हैं।

प्रार्थना कक्ष के फर्श में कालीन बिछाई गई है, जिसका रंग गुलाबी है। सामने एक मंच है, जहाँ से कभी कभी हमारे प्रधानाचार्य स्पीच देते हैं। हमारे स्कूल के सबसे नीचे वाली मंजिल में ही प्रधानाध्यापक का कक्ष है। इसके ठीक बगल में पुस्तकालय बना हुआ है, हम सब अपनी जरूरत की कई किताबें पुस्तकालय से ही लेते हैं।

पुस्तकालय के बगल में फीस जमा करने का कक्ष बना हुआ है, यही पर फ़ीस से संबंधित सभी काम किए जाते हैं।

स्कूल में मिलने वाली सुविधाएँ

हमारे स्कूल में जरूरत की हर सुविधा उपलब्ध है। जैसे कि कई बच्चों को खेल में काफी रुचि होती है तो ऐसे स्टूडेंट्स के लिए खेल से जुड़े सभी सामान मिल जाते हैं।

हमारे स्कूल में क्रिकेट से संबंधित सभी सामान मौजूद है, जैसे बैट, गेंद, विकेट, ग्लब्स आदि। वही फुटबाल पसंद करने वालों के लिए यहां पर फ़ुटबॉल भी मौजूद है। इसके साथ साथ, बैडमिंटन, रस्सी कूद जैसे खेल की तमाम सुविधाएं यहाँ मिल जाती है।

कुछ स्टूडेंट्स को खेल में आगे बढ़ना होता है और उन्हें लंबी कूद, ऊंची कूद, गोला फेक, भाला फेक जैसी कई प्रतियोगिताएं काफी लुभाती है। ऐसे विद्यार्थियों के ट्रेनिंग के लिए भी हमारे स्कूल में पर्याप्त साजो-सामान मौजूद है।

खेल से अलग बात करें तो हमारे स्कूल में एक बेहतरीन कंप्यूटर लैब है, जिसमें करीब 60 कंप्यूटर्स होंगे। हर स्टूडेंट को एक एक कंप्यूटर दिया जाता है। कंप्यूटर चलाना हम सबको बहुत पसंद होता है, इसलिये कंप्यूटर का क्लास मुझे बहुत पसंद होता है।

कंप्यूटर के अलावा पुस्तकालय भी मुझे बहुत पसंद है। जहां से मुझे अपने पसंद की कई किताबें मिल जाती है। हमारे स्कूल के पुस्तकालय में कोर्स की किताबों के साथ साथ अन्य तरह की किताबें भी रहती है। जैसे कि किस्से कहानियों की किताबें, कविताओं और महान पुरुषों की जीवनी संबंधी किताबें।

मुझे कविताओं और महान लोगों की जीवनी पढ़ने में काफी रुचि है। इसलिए मैं बार बार वही किताबें पुस्तकालय से जारी करवाता रहता हूँ।

स्कूल में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम

मेरे स्कूल में हमेशा दिन में 3 वक़्त प्रार्थना होती है। पहली प्रार्थना सुबह के वक़्त होती है जब हम लोग स्कूल आते हैं। इस दौरान हम सरस्वती वंदना, गीता पाठ करते हैं। इसके बाद 5 मिनट के लिए भ्रामरी प्राणायाम, और ॐ का उच्चारण करते हैं।

प्राणायाम करने के बाद हमारी एकाग्रता काफी ज्यादा बढ़ जाती है, जिससे पढ़ाया हुआ हमे आसानी से और जल्दी समझ मे आता है। इसके बाद भोजन के वक़्त भी हम एक प्रार्थना करते हैं।

फिर जब स्कूल से छुट्टी होती है तो एक छोटी सी प्रार्थना होती है। इन सब के अलावा हमारे स्कूल में हर साल सरस्वती पूजा का कार्यक्रम बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। कई मुख्य अतिथि भी इसमे शामिल होते हैं।

हर साल वार्षिक समारोह का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें कई स्टूडेंट्स भाग भी लेते हैं। स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस जैसे महत्वपूर्ण पर्व बहुत अच्छे से मनाए जाते हैं।

इसके अलावा हर वर्ष पूर्व छात्र मिलन नाम का एक प्रोग्राम चलाया जाता है, जिसमे हमारे स्कूल में पढ़े हुए कई छात्रों को बुलाया जाता है। इसमे से कई ऐसे होते हैं जो अपने कैरियर में काफी ऊँचाई में होते हैं।

ऐसे पूर्व छात्रों के जरिए लगातार हमे अच्छी अच्छी बातें बताई जाती है और साथ मे भविष्य में आने वाली चुनौतियों से भी अवगत करवाया जाता है।

स्कूल में होने वाली परीक्षाएं

मेरा स्कूल इन सब चीजों के साथ साथ पढ़ाई पर भी विशेष ध्यान देता है। इसलिए हर माह मासिक टेस्ट जरूर होती है। मासिक टेस्ट हालांकि उतना कठिन नही होता है, लेकिन फिर भी इस टेस्ट में भी अच्छा करने का दवाब हमारे ऊपर बना रहता है।

इसके साथ ही हर तीन तीन माह में हमारी परीक्षाएं आयोजित करवाई जाती है। जैसे 3 माह बाद त्रैमासिक परीक्षाएं, 6 माह बाद अर्धवार्षिक परीक्षाएं और फिर आखिरी में वार्षिक परीक्षाएं आयोजित करवाई जाती हैं।

इन्ही तीनो परीक्षाओं के आधार पर हमारा रिजल्ट बनाया जाता है। इसके साथ साथ हमारी स्टूडेंट्स के लिए हर वर्ष प्रवेश परीक्षाएं भी आयोजित कराई जाती है। इसके लिए स्कूल के शिक्षक ही पेपर तैयार करते हैं और नंबर के आधार पर  स्टूडेंट्स की एक सूची तैयार करते हैं।

स्कूल के शिक्षक

हमारे स्कूल के शिक्षकों की बात करें तो वह सब बहुत ही योग्य और हमारे साथ सहानुभूति जताने वाले होते हैं।  सभी शिक्षक इस बात की पूरी कोशिश करते हैं कि विषय की समझ हमारी गहरी हो। इसके लिए वह विषय को पूरी गहराई से समझाते हैं।

इसके साथ ही यदि किसी भी स्टूडेंट को विषय को समझने में दिक्कत हो रही है, तो वह क्लास के बाद अलग से उंस विषय के शिक्षक से मिलकर उस टॉपिक को दोबारा भी समझा सकता है।

इसके लिए कोई भी शिक्षक मना नही करता है। यदि मैं बताऊं की मुझे सबसे अधिक कौन से शिक्षक पसंद है तो मैं कहूंगा कि वैसे तो सभी शिक्षक पसंद है। लेकिन जो मुझे हिंदी पढ़ाते हैं, उनके पढ़ाने का तरीका काफी अलग है जो कि मुझे बहुत अच्छा लगता है।

वही स्कूल में खेल के लिए एक अलग शिक्षक नियुक्त किये गए हैं, जिनका काम सिर्फ हम लोगो को खेल खिलाना और सीखाना है।

किसी भी व्यक्ति के जीवन की मीठी यादों में स्कूल का जीवन जरूर शामिल होता है। इसलिए मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानता हूं कि मुझे एक ऐसे वातावरण में रहने और पढ़ने का अवसर मिल रहा है, जो बहुत ही सकारात्मक है, जहां से मैं हर दिन काफी कुछ सीखता हूँ।

यहाँ मुझे हर दिन अच्छा लगता है। शिक्षको का सानिध्य और अपने दोस्तों का साथ मुझे स्कूल छोड़ने के बाद भी बहुत याद रहेगा और मै इसे हमेशा याद करूँगा।

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मेरा विद्यालय पर निबंध (Short Essay On My School In Hindi)

मेरे विद्यालय का नाम उच्चय विद्यालय हैं। ये एक बहुत बड़ी ईमारत हैं और इसमें सभी क्लास के क्षात्रो के लिए अलग अलग कमरा बनाये हुए हैं। सभी क्लास में खिड़किया बनायी हुइ हैं, जिससे हमें प्राकृतिक रौशनी मिल पाती हैं।

मेरे स्कूल में हर कक्षा में बेंच लगाये हुए हैं। इस विद्यालय में हम पहली क्लास से पढ़ते आ रहे हैं। हमारे पाठशाला में सभी विषय के शिक्षक उपलब्ध हैं। जब हम सुबह में विद्यालय आते हैं, तो हमारे बिद्यालय की साफ -सफाई होते रहती हैं और हमारे विद्यालय के क्लास रूम भी साफ सुथरे रहते हैं। जिस वजह से मुझे मेरे विद्यालय में पढ़ना अच्छा लगता हैं।

विद्यालय आने के बाद हमें सबसे पहले प्रार्थना करवायी जाती हैं। उस प्रार्थना में विद्यालय के सभी विद्यार्थी और सभी शिक्षक शामिल होते हैं। प्रार्थना के समय कोई भी बच्चा शोर नहीं करता हैं।

नहीं तो अगर कोई भी बच्चा प्रार्थना के समय कुछ और करते रहता हैं। उसे प्रार्थना ख़त्म होने के बाद हमारे विद्यालय के शिक्षक उसे कुछ न कुछ सजा देते हैं। इसलिए हमारे बिद्यालय में सभी क्षात्र शांति पूर्वक प्रार्थना करते हैं।

प्रार्थना खत्म होने के बाद सभी बच्चो को राष्ट्रीय गाण करवाया जाता हैं और “भारत माता की जय” का नारा लगाया जाता हैं। मेरे स्कूल में सभी बहुत ही अनुशासन में रहते हैं और अनुशासन से पढ़ाई भी करते हैं।

मेरे स्कूल के सभी शिक्षक अपने समय से विद्यालय में आते हैं और हमें पढ़ाने के लिए समय पर क्लास में आते हैं। मेरा विद्यालय का एक बहुत ही अच्छा नियम हैं, जो की है समय से घंटी बजाना और उसी घंटी के अनुशार हमारे सभी बिषय के शिक्षक मेरे क्लास में पढ़ाने आ जाते हैं।

हमारे सभी विषय के शिक्षक रोज पढ़ाने के बाद कुछ ना कुछ घर से (होम वर्क) बनाने के लिए जरूर देते हैं। और दुशरे दिन वो क्लास के सभी बच्चो की कॉपी देखते हैं और जो भी विद्यार्थी होम वर्क नहीं बना कर ले आता है उसे छोटी सी सजा दी जाती हैं। और जो विद्यार्थी होम वर्क बना कर के ले आता है उसे शिक्षक शाबासी देते हैं और उसकी प्रशंसा भी करते है ।

मेरे विद्यालय में सभी शिक्षक अपने -अपने विषय का साप्ताहिक जाँच (टेस्ट) लेते हैं और इसमें देखते हैं कौन विद्यार्थी कितना सीखा। इस टेस्ट में जो अच्छा नंबर लाता हैं उसे पुरस्कार से सम्मानित किया जाता हैं।

इससे हम सभी के मन में बना रहता हैं की अलगे टेस्ट में हम सब से ज्यादा नंबर लाएंगे और पुरस्कार जीतेंगे और इससे हम अपने पढाई पे ज्यादा मेहनत करते हैं।

हमे दोपहर में खाना खाने के लिए समय मिलता हैं। इस समय हम सभी अपने दोस्तो के साथ विद्यालय के ग्राउंड में बैठ कर अपना अपना खाना खाते हैं। मेरा विद्यालय का फिल्ड बहुत बड़ा हैं इसमें बहुत सारे तरह -तरह के पेड़ लगा हुआ हैं। उन पेड़ो को रोज पानी दिया जाता हैं, जिससे हमारे स्कूल का मैदान हरा -भरा रहता हैं।

हमे खेलने के लिए भी समय दिया जाता हैं, जिसमे हमारे खेल के शिक्षक हमे तरह -तरह का खेल खेलणा सिखाते हैं और हम सब उन खेलो का आनंद लेते हैं। शाम तक हमारे सभी विषय की पढ़ाई हो जाती हैं और फिर हमे छुट्टी मिल जाती हैं और उसके पश्चात हम अपने घर पे चले जाते हैं।

हमारे जिंगदगी में विद्यालय एक ऐसी जगह हैं जहा हम अपने माता -पिता से दूर रह कर कुछ घंटो के लिए अपने दिक्कतो का खुद से सामना करते हैं। वहाँ से हम अपनी जिंदगी की शुरुआत करते हैं।

हम अपने बचपन से बड़े होने तक अनेक प्रकर के विद्यालय में पढ़ते हैं। जैसे आंगनवाड़ी, प्राथमिक विद्यालय, माध्यमिक विद्यालय, उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय और विशव विधालय।

आँगनवाड़ी – ये एक छोटा सा केन्द्र होता है जो की मुहल्ले में ही होता है। यहाँ पर हमारे गाँव या मोहल्ले के छोटे -छोटे बच्चो को शिक्षा देने की शुरुआत कि जाती है। यहाँ के शिक्षक बच्चो को कुछ घंटो के लिए अपने परिवार से दूर रहना सिखाते हैं।

आँगनवाड़ी केन्द्र में ज्यादा देर तक पढाई नहीं होती हैं, बच्चो को यहाँ कुछ घंटो के लिए पढ़ाया जाता हैं। ये केंद्र सरकारी होते हैं इसका सभी खर्च सरकार द्वारा दिया जाता हैं।

प्राथमिक विद्यालय – यहाँ क्लास प्रथम से लेकर क्लास (कक्षा) पाँच तक पढाई होती हैं। जिसमे बच्चो को पढ़ाई का और स्कूल आने का तौर -तरीका सिखाया जाता हैं।

माध्यमिक विद्यालय – यहाँ क्लास आठवीं तक पढ़ाया जाता हैं। इस विधालय में बच्चो को सभी विषय का थोड़ी – बहुत जानकारी दि जाती हैं। माध्यमिक विद्यालय का समय ज्यादा तक सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होता हैं।

उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय – यहाँ बच्चो को अच्छे से सभी विषय का अनुभव हो जाता हैं। इस विद्यालय में आने के बाद हम अपने आप कुछ पढ़ने लायक बन जाते हैं। इस विधालय में अनुसासन भी अच्छी तरह से सीखाया जाता हैं।

विशव विधालय – यहाँ हमें दुनियाँ की सभी उच्च शिक्षा मिलती हैं। यह आने के बाद सभी बच्चे अपने पढाई को समझने लगते है और उन्हें जिस विषय में ज्यादा रूचि होती हैं। उसमें अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए पढाई करते हैं।

स्कूल और विद्यालय के लिए जरुरी चीजे 

विद्यालय के आस -पास और विद्यालय में शांति का वातावरण होना बहुत जरुरी हैं। इससे विद्यालय के बच्चो को पढाई में ध्यान लगाने में कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

विद्यालय में सभी विषयो का अच्छा शिक्षक उपलब्ध होना चाहिए। जिससे विधार्थी को सभी विषय पर उचित जानकारी मिल सके और बच्चो को कोई भी विषय के सम्बन्ध में दिक्कत आये तो उसका जबाब शिक्षक दे सके।

विद्यालय में शिक्षक और विधार्थी को अनुशासित रहना चाहिए, इससे हमारे विद्यालय का नाम रौशन होगा। रोज नियमित रूप से सभी बच्चो को होम वर्क (H.W) मिलना चाहिए, जिससे बच्चे अपने घर पे भी कुछ देर पढाई से जुड़े रहे।

विधालय में साफ सफाई रोज होना चाहिए, जिससे विधालय में किसी को बीमारियो का सामना नहीं करना पढ़े और सभी स्वस्थ रह सके। विद्यालय में शौचालय जरूर होना चाहिए और बच्चो को पिने के लिए शुद्ध पिने के पानी की व्यबस्था जरूर होनी चाहिए।

स्कूल में कुछ ना कुछ आयोजन करते रहना चाहिए, इससे विधार्थी अपने स्कूल के साथ आसानी से जुड़ने लगते हैं। स्कूल में नियमित गाणा, डांस और खेलो का आयोजन होना चाहिए और इनकी सुविधा होनी चाहिए। जिससे बच्चो का विद्यालय में मन लगा रहेगा और कुछ न कुछ सिखने को भी मिलता रहेगा।

विद्यालय में साप्ताहिक क्लास टेस्ट होनी चाहिए, इससे बच्चो का मनोवल बढ़ते रहता हैं और विद्यार्थी अपने आप से मेहनत करने की ज्यादा कोशिश करते हैं। इससे विद्यार्थी पढाई में ज्यादा ध्यान देते हैं।

विद्यालय जिंदगी का बहुत बड़ा हिस्सा हैं, जहाँ से हम बहुत सारी अच्छी बाते सीखते हैं। इसीलिए अपने विद्यालय का और अपने शिक्षक का हमेशा सम्मान करना चाहिए। विद्यालय में पढ़ते पढ़ते उससे हमारे बहुत सारी यादे जुड़ जाती हैं।

हमें अपने विद्यालय के बारे में हमेसा अच्छा सोचना चाहिए और अपने लिए और साथ में अपने विद्यालय के लिए कुछ ना कुछ अच्छा करना चाहिए।

तो यह था मेरा स्कूल विषय पर निबंध, आशा करता हूं कि मेरा स्कूल विषय   पर हिंदी में लिखा निबंध (Hindi Essay On My School) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा है, तो इस लेख को सभी के साथ शेयर करे।

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मेरा विद्यालय पर निबंध

Essay on My School in Hindi

मेरा विद्यालय पर निबंध : Essay on My School in Hindi :- आज के इस लेख में हमनें ‘मेरा विद्यालय पर निबंध’ से सम्बंधित जानकारी प्रदान की है।

यदि आप मेरा विद्यालय पर निबंध से सम्बंधित जानकारी खोज रहे है? तो इस लेख को शुरुआत से अंत तक अवश्य पढ़े। तो चलिए शुरू करते है:-

मेरा विद्यालय पर निबंध : Essay on My School in Hindi

प्रस्तावना :-

विद्यालय वह स्थान होता है, जहाँ विद्यार्थी एक साथ बैठकर शिक्षा प्राप्त करते है। यह वह स्थान है, जहाँ बच्चों का मानसिक विकास होता है। भारतीय संस्कृति में विद्यालय को मंदिर का दर्जा दिया गया है।

मनुष्य के जीवन में बाल्यकाल सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। हमारे जीवन का महत्वपूर्ण समय वह होता है, जब हम ज्ञान ग्रहण करते है और वह समय विद्यालयों में ही व्यतीत होता है।

यहाँ हम सभी अपने जीवन का महत्वपूर्ण ज्ञान प्राप्त करते है। विद्यालय मनुष्य को जीवन की राह में ज्ञान का प्रकाश प्रदान करता है। यहाँ से मिला ज्ञान मनुष्य के जीवनभर काम आता है।

विद्यालय में बिताए हुए पल जीवन के खूबसूरत पल होते है, जिन्हें मनुष्य कभी भी भूल नहीं पाता है। यहाँ बच्चे ज्ञान प्राप्त करने के साथ-साथ नए मित्र बनाकर उनके साथ मस्ती करते है। यहाँ बिताए गए कुछ खट्टे-मीठे पल हमें हमेशा याद रहते है।

मेरा विद्यालय :-

मेरे विद्यालय का नाम —— है। यह मेरे घर के पास में ही स्थित है। मुझे घर से विद्यालय पहुँचने तक सिर्फ पांच मिनट का समय लगता है। मेरा विद्यालय काफी सुंदर एवं पढ़ने योग्य है।

मेरे विद्यालय में एक पुस्तकालय भी मौजूद है, जहाँ पर बहुत शांति होती है। जिससे सभी विद्यार्थी आसानी से पढ़ाई कर सके। यहाँ सभी प्रकार की पुस्तकें मौजूद है।

यहाँ का माहौल काफी अच्छा है। यहाँ के अध्यापक भी अच्छे है। यहाँ हमे शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक ज्ञान भी दिया जाता है। हमारे अध्यापक हम पर बड़ी ही मेहनत करते है।

मेरे विद्यालय का परिसर :-

मेरे विद्यालय का परिसर काफी विशाल है। हमारे विद्यालय की 2 ईमारतें है। इसके सामने की तरफ एक काफी बड़ा खेल का मैदान है, जहाँ सभी बैठते व खेलते है और प्रार्थना भी यहीं पर करते है।

इस मैदान के चारों तरफ पेड़-पौधे उगे हुए है और शेष जगह छोटी-छोटी घास उगी हुई है। इसी के पास में वोलीबाल का मैदान है, जहाँ सभी बच्चे खेल खेलते है।

मेरे विद्यालय में सुविधाएं :-

हमारे विद्यालय में वें सभी सुविधाएँ उपलब्ध है, जो एक विद्यार्थी को शिक्षा प्राप्त करने के लिए आवश्यक होती है। यें सभी सुविधाएँ निम्नलिखित है:-

  • मेरे विद्यालय में बस की सुविधा उपलब्ध है, जिससे दूर के बच्चे भी बस के द्वारा विद्यालय पहुँचकर शिक्षा प्राप्त कर सके ताकि, कोई भी विद्यार्थी दूरी की वजह से शिक्षा से वंचित न रह जाए।
  • मेरे विद्यालय में साफ व ठंडा पानी पीने की उचित सुविधा उपलब्ध है।
  • मेरे विद्यालय में एकांत में पढ़ाई करने के लिए पुस्तकालय की सुविधा भी उपलब्ध है।
  • हमारे विद्यालय में कम्प्यूटर भी उपलब्ध है, जहाँ रोजाना कक्षा चलती है और विद्यार्थियों को कम्प्यूटर का ज्ञान प्रदान किया जाता है।
  • हमारे विद्यालय में विभिन्न प्रकार के समारोह तथा कार्यक्रमों का आयोजन करने के लिए एक बड़ा ऑडिटोरियम भी मौजूद है, जहाँ पर विद्यालय के सभी कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
  • हमारे विद्यालय में छात्रों व छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय बने हुए है।
  • हमारे विद्यालय के प्रत्येक कक्षा में ब्लेकबोर्ड लगा हुआ है और अब धीरे-धीरे हमारे विद्यालय में प्रोजेक्टर से भी कक्षाएं उपलब्ध करवाई जाती है।
  • हमारे विद्यालय की सभी कक्षाओं में विद्यार्थियों के लिए बैठने के लिए कुर्सी एवं टेबल लगी हुई है, जिस पर बैठकर ही हम विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते है।

मेरे विद्यालय के अध्यापक :-

हमारे विद्यालय में प्रत्येक विषय के लिए एक अध्यापक है। सभी अध्यापक काफी अच्छा पढ़ाते है। वें हमेशा ही समय पर कक्षा में उपस्थित होते है और कभी भी विद्यालय में उपस्थित होने में देर नहीं करते है। वे हमें काफी मन से पढ़ाते है।

जब भी हमें पढ़ने में कोई समस्या आती है या किसी प्रश्न में कोई परेशानी आती है, तो हम उनके पास परेशानी का हल प्राप्त करने के लिए चले जाते है और वें हमेशा हमें प्यार से समझाते है। हमारे विद्यालय के सभी अध्यापक हम सभी विद्यार्थियों के साथ समानता का व्यवहार करते है।

प्रत्येक विद्यार्थी के लिए विद्यालय काफी महत्वपूर्ण स्थान होता है। विद्यालय में एक विद्यार्थी अपने जीवन का काफी महत्वपूर्ण समय व्यतीत करता है। विद्यालय से ही एक विद्यार्थी अपना जीवन प्रारम्भ करता है।

कहा जाता है कि यदि आपको किसी देश का भविष्य देखना है, तो वहाँ के विद्यालयों में चले जाओ। विद्यालयों में विद्यार्थियों के रूप में आपको उस देश का भविष्य दिखाई दे जाएगा। इन विद्यालयों में ही देश के भविष्य की नींव रखी जाती है।

यदि हमारें विद्यालय की व्यवस्था ठीक नहीं है, तो हमारा भविष्य खतरे में होगा। इसलिए, हमें अपने देश के भविष्य को बचाना है। इसके लिए विद्यालयों की व्यवस्था को सुव्यवस्थित रखकर व उनका लगातार विकास करना होगा। तभी बच्चे अपना व इस देश का भविष्य बना पाएंगे।

विद्यालय एक ऐसा स्थान होता है, जहाँ एक बच्चा अपने भविष्य की नींव रखता है। विद्यालय में एक बच्चा अपने करियर को ऊँचाई पर ले जाता है। आदिकाल से विद्यायल को विद्या का मंदिर माना जाता है। पहले विद्यार्थी अपने गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त किया करते थे।

यहाँ उन्हें उस समय के अनुसार शास्त्रों का अध्ययन करवाया जाता था। इसके साथ ही उन्हें शस्त्र चलाने का प्रशिक्षण भी दिया जाता था। प्राचीनकाल में एक बच्चा अपना पूरा समय गुरुकुल में ही रहा करता था।

वर्तमान समय में गुरुकुल का स्थान विद्यालय ने ले लिया है। आज सभी बच्चे विद्यालय में शिक्षा प्राप्त करते है। जहाँ उन्हें आज इस आधुनिक युग के अनुसार भाषा, विज्ञान व गणित का ज्ञान दिया जाता है।

विद्यालय स्थल :-

हमारा विद्यालय एक बहुत बड़े क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यह शहर से 2 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है। यहाँ आसपास बहुत ही शांत इलाका है। इसका परिसर 1000 गज में फैला हुआ है। यहाँ मध्य में एक 3 मंजिला इमारत है, जहाँ सभी बच्चे शिक्षा प्राप्त करते है।

यहाँ के कमरे बहुत बड़े व हवादार है। यहाँ प्रतिदिन सफाई होती है। सभी विद्यार्थियों के कक्षाओं में बैठने की उचित व्यवस्था है। इसके साथ ही हमारी कक्षाओं के ब्लैकबोर्ड बहुत बड़े है, जो पीछे वाली पंक्ति में बैठे विद्यार्थियों को भी साफ दिखाई देते हैं।

इसके साथ ही कईं कक्षाओं में प्रोजेक्टर भी लगे हुए है, जहाँ विद्यार्थियों को प्रयोगों से सम्बंधित शिक्षा प्रदान की जाती है। यहाँ पर कक्षा 1 से कक्षा 12 तक के विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करते है।

विद्यालय परिसर व खेल मैदान :-

हमारे विद्यालय का परिसर काफ़ी विशाल है। यहाँ चारों तरफ पेड़-पौधे लगे हुए है। जिनके कारण यहाँ चारों तरफ हरियाली है। हमारे विद्यालय के सामने प्रार्थना कक्ष है, जहाँ प्रतिदिन सुबह सभी विद्यार्थी प्रार्थना करने के लिए एकत्रित होते है।

यहाँ एक सुंदर बाग़ भी है, जहाँ रंग-बिरंगे फूल उगे हुए है। यहाँ अनेकों प्रकार के पेड़-पौधे है। जिस कारण से हमारे पूरे विद्यालय का वातावरण बहुत ही साफ रहता है। इसके साथ ही हमारे विद्यालय में एक काफी विशाल खेल का मैदान है, जहाँ सभी विद्यार्थी खेल खेलते हैं।

हमारे विद्यालय में सबसे अधिक अनुशासन का ध्यान रखा जाता है। हमारे विद्यालय में हमारे अध्यापक अनुशासन का काफ़ी अधिक ध्यान रखते हैं। सभी विद्यार्थियों को पूरी तरह से साफ-सुथरी विद्यालय की पोशाक पहनकर विद्यालय में प्रवेश दिया जाता है।

इसके साथ ही छोटे बाल व कटे हुए नाखून होने चाहिए। जब भी कक्षा शुरू होती है, तब सभी विद्यार्थियों को शांतिपूर्वक रूप से पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए कहा जाता है।

सभी विद्यार्थी आपस में बहुत ही अच्छे से बात करते है। हमारे विद्यालय में सभी का व्यवहार काफ़ी अच्छा है। किसी भी प्रकार के अनुशासन को भंग करने पर विद्यार्थियों को दंडित किया जाता है।

अध्यापक, अध्यापिकाएं व प्रधानाध्यापक :-

हमारे विद्यालय में प्रत्येक विषय के लिए एक भिन्न अध्यापक है। सभी अध्यापक बहुत अधिक ज्ञानी है। वें सभी बहुत ही अनुभवी है। सभी हमें काफ़ी अच्छे तरीके से शिक्षा प्रदान करते हैं। सभी प्रयोगिक विषयों को प्रयोग के माध्यम से समझाते हैं।

हमारे प्रधानाध्यापक जी भी बहुत शांत स्वभाव के है। वह भी कभी-कभी हमें शिक्षा प्रदान करते है। उन्हें अनुशासन काफ़ी अधिक पसंद है। वह हमारे विद्यालय की सम्पूर्ण गतिविधियों व आवश्यकताओं का काफ़ी अच्छे से ध्यान रखते है।

प्रतियोगिता व समारोह :-

हमारे विद्यालय में विद्यार्थियों के विकास के लिए विद्यालय द्वारा अलग-अलग प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है, जिससे विद्यार्थियों में कुछ करने की भावना का विकास हो सके।

इसके साथ-साथ हमारे विद्यालय में बहुत से सांस्कृतिक समारोहों का आयोजन किया जाता है, जिससे विद्यार्थियों में सांस्कृतिक विकास भी हो सके।

हमारे विद्यालय में कईं खेलों का भी आयोजन किया जाता है। यदि कोई विद्यार्थी इन खेलों में जीत प्राप्त करता है, तो उसे उच्च स्तर पर भी खेलने का मौका मिलता है।

किसी भी विद्यार्थी के लिए शिक्षा एक बहुत आवश्यक साधना है, जिससे वह अपने जीवन को उज्जवल बना सके। अच्छी शिक्षा के लिए एक अच्छा विद्यालय भी होना जरूरी है।

हमारे विद्यालय में सभी प्रकार की आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध है, जो एक विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए जरूरी है। हमारे विद्यालय में विद्यार्थियों को प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण होने पर इनाम भी दिया जाता है।

इसके साथ ही विद्यार्थियों का पूर्ण विकास हो, इस बात का भी ध्यान रखा जाता है। इसलिए हमारा विद्यालय बहुत अच्छा है। वह एक आदर्श विद्यालय है।

अंत में आशा करता हूँ कि यह लेख आपको पसंद आया होगा और आपको हमारे द्वारा इस लेख में प्रदान की गई अमूल्य जानकारी फायदेमंद साबित हुई होगी।

अगर इस लेख के द्वारा आपको किसी भी प्रकार की जानकारी पसंद आई हो तो, इस लेख को अपने मित्रों व परिजनों के साथ  फेसबुक  पर साझा अवश्य करें और हमारे  वेबसाइट  को सबस्क्राइब कर ले।

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नमस्कार, मेरा नाम सूरज सिंह रावत है। मैं जयपुर, राजस्थान में रहता हूँ। मैंने बी.ए. में स्न्नातक की डिग्री प्राप्त की है। इसके अलावा मैं एक सर्वर विशेषज्ञ हूँ। मुझे लिखने का बहुत शौक है। इसलिए, मैंने सोचदुनिया पर लिखना शुरू किया। आशा करता हूँ कि आपको भी मेरे लेख जरुर पसंद आएंगे।

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My School Essay in Hindi

My School Essay in Hindi: मेरे स्कूल पर निबंध

क्या आप भी mera vidyalaya par nibandh की तलाश कर रहे हैं? यदि हां, तो आप इंटरनेट की दुनिया की सबसे बेस्ट वेबसाइट essayduniya.com पर टपके हो. यदि आप भी my school essay in hindi , essay on school in hindi, mera school essay in hindi, mera vidyalaya par nibandh, mera vidyalaya in hindi, mera vidyalaya nibandh in hindi यही सब सर्च कर रहे हैं तो आपका इंतजार यही पूरा होता है.

My School Essay in Hindi

यहां हम आपको एक शानदार my school essay in hindi उपलब्ध करा रहे हैं. इस निबंध को आप कक्षा 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 और 12 के लिए या अपने किसी प्रोजेक्ट के लिए उपयोग कर सकते हैं. यदि आप को किसी स्पीच के लिए टॉपिक essay on school in hindi मिला है तो आप इस लेख को स्पीच के लिए भी उपयोग कर सकते हैं. इसके साथ ही यदि आपको किसी निबंध प्रतियोगिता के लिए भी mera vidyalaya par nibandh लिखना है तो आपको यह आर्टिकल पूरा बिल्कुल ध्यान से पढ़ना चाहिए.

essay on school in hindi (100 Words)

विद्यालय को ज्ञान का मंदिर कहा जाता है। यहां पर बच्चों को ज्ञान का प्रकाश दिया जाता है, जिससे बच्चे उनके भविष्य को उज्जवल बना सके। यह मेरे घर से कुछ ही दूरी पर स्थित है।

मेरा विद्यालय शहर की भीड़भाड़ से दूर एकांत जगह में स्थित है। प्राचीन काल से ही विद्यालयों के लिए ऐसे स्थान के रूप में देखा जाता है जहां ज्ञान प्राप्त करने के लिए हर साधन उपलब्ध होता है।

यहां पर किसी प्रकार का शोर नही होता क्योंकि पढ़ाई के लिए शांति की आवश्यकता होती है। मेरे विद्यालय का भवन बहुत सुंदर है। यह बहुत बड़ी जगह में फैला हुआ है, इसके चारों ओर ऊँची-ऊँची दीवारें हैं। मुझे मेरे विद्यालय से अति प्रेम है।

mera school essay in hindi (200 Words)

हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हमारा बचपन होता है जिसमें हम सभी चिंताओं से मुक्त होकर अपने लिए जीते हैं। हमारे बाल्यकाल का समय विद्यालय में ही व्यतीत होता है। विद्यालय की हमारे जीवन में बहुत अहमियत होती है। मेरे विद्यालय का नाम राम किशन मिशन स्कूल है। मेरा विद्यालय बड़ा है सुंदर है यह चारों ओर से प्रकृति से घिरा हुआ है।

विद्यालय को ज्ञान का मंदिर कहां जाता है और ज्ञान प्राप्त करने के लिए यह सर्वश्रेष्ठ स्थान होता है क्योंकि ज्ञान प्राप्त करने के लिए शांति और अच्छा वातावरण चाहिए होता है, जो कि आपको सिर्फ विद्यालय में ही मिल सकता है।

बच्चे स्कूल जाकर शांति से मन लगाकर पढ़ाई कर सकते हैं। मेरे विद्यालय में विभिन्न प्रकार के आउटडोर खेल खेलने के लिए एक बड़ा और सुंदर खेल का मैदान है। इसके साथ मेरे विद्यालय में सप्ताह में एक बार शारीरिक परीक्षण रखा जाता है, जिसके अंतर्गत सभी छात्र-छात्राओं की शारीरिक क्षमता को नापा जाता है।

मेरे विद्यालय में काफी अनुभवी और दयालु शिक्षक हैं, जो बच्चों को बड़े ही प्रेम के साथ पढ़ाते हैं। विद्यालय में मेरे कई सारे दोस्त हैं जिनके साथ में लंच ब्रेक में गेम खेलता हूं। मेरे विद्यालय में एक बड़ी लाइब्रेरी भी है जिसमें सभी छात्र किताबें पढ़ सकते हैं। मुझे प्रतिदिन विद्यालय जाना बहुत पसंद है।

my school essay hindi

mera vidyalaya par nibandh (300 Words)

विद्यालय को शिक्षा और ज्ञान का द्वार कहां जाता है। यह वही द्वार है, जो हमें भविष्य में आगे सफलता की ओर ले जाता है। सभी लोगों ने अपने जीवन में विद्यालय से बहुत कुछ सीखा है, उसी तरह में भी मेरे विद्यालय में अच्छे जीवन की सीख ले रहा हूं। मेरे विद्यालय का नाम ब्रिलिएंट अकेडमी है यह नगर के अच्छे विद्यालयों में से एक है।

मेरा विद्यालय शहर की भीड़-भाड़ से दूर खुली जगह पर स्थित है। मैं प्रतिदिन स्कूल बस से स्कूल जाता हूं। विद्यालय का भवन काफी बड़ा है और इसमें एक बड़ा खेल का मैदान भी है। सुबह जल्दी विद्यालय पहुंचने के बाद सभी छात्र छात्राएं सुबह की प्रार्थना के लिए एकत्रित होते हैं। प्रार्थना के बाद सभी बच्चे अपनी अपनी क्लास में पुनः लौट जाते हैं।

विद्यालय में बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद पर भी काफी ध्यान दिया जाता है। इसमें विज्ञान की प्रयोगशाला भी है, जिसमें बच्चों को विज्ञान से संबंधित प्रयोग कराए जाते हैं। बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखने के लिए सप्ताह में एक बार योगा भी कराया जाता है।

मेरे विद्यालय के शिक्षक बच्चों को इमानदारी समर्पण और अच्छे आचरण की शिक्षा देते हैं। यहां बच्चों को अच्छे व्यवहार के बारे में सिखाया जाता है। मेरे सभी शिक्षक बड़े ही दयालु और बुद्धिमान हैं, जो अपने ज्ञान से हमें भविष्य में सफल होने योग्य बना रहे है। मेरे विद्यालय भवन की बनावट काफी सुंदर है इसमें एक बड़ा खेल का मैदान भी है जिसमें सभी बच्चे हर तरह का आउटडोर गेम बड़ी आसानी से खेल सकते हैं।

बच्चों को अधिक ज्ञान देने के लिए यहां पुस्तकालय और विज्ञान प्रयोगशाला भी है, जहां बच्चे आसानी से विज्ञान के सभी प्रयोग कर सकते हैं। विद्यालय में मेरे बहुत से मित्र हैं, मुझे मेरे विद्यालय से काफी स्नेह है और मुझे प्रतिदिन विद्यालय जा कर पढ़ाई करना बहुत अच्छा लगता है। 

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mera vidyalaya nibandh in hindi (400 Words)

विद्यालय का शाब्दिक अर्थ है विद्या+ आलय मतलब विद्यालय एक ऐसा स्थान है, जहां विद्या प्राप्त की जाती है। हमारी संस्कृति में विद्या को देवी का स्थान दिया गया है और विद्यालय को मंदिर का। विद्यालय विद्यार्थी जीवन का एक ऐसा विषय है जिसे वह सबसे अधिक प्रेम करता है। विद्यालय में बिताए गए जीवन को विद्यार्थी कभी नहीं भूल सकता। इसी स्थान से हमारे भविष्य का निर्माण होता है। विद्यालय में ज्ञान देने वाले शिक्षक देवता के समान होते हैं जो अपनी जीवन भर की पूंजी हमें ज्ञान के स्वरूप में प्रदान करते हैं। मेरे जीवन में मेरे विद्यालय का बड़ा प्रभाव है।

मेरे विद्यालय का वर्णन 

मेरे विद्यालय का नाम आशुतोष पब्लिक स्कूल है। यह मेरे घर से कुछ ही दूरी पर स्थित है। मेरा स्कूल भवन काफी बड़ा है और इसमें एक हरा भरा खेल का मैदान भी है। स्कूल सुबह 7:00 बजे प्रारंभ होता है और सभी बच्चे सुबह खेल के मैदान में एक साथ एकत्रित होकर प्रार्थना करते हैं। मेरा विद्यालय मेरे लिए मेरा दूसरा घर है। यहां मेरे बहुत सारे दोस्त हैं जिनके साथ में लंच ब्रेक में गेम खेलता हूं। विद्यालय के सभी शिक्षक बड़े ही दयालु और बुद्धिमान है वह हमें हमारे अभिभावकों की तरह ही प्रेम से ज्ञान देते हैं। मेरे विद्यालय में बच्चों के लिए विज्ञान तथा बायलॉजी प्रयोगशाला भी हैं। इसके साथ ही विद्यालय में एक बड़ा सा पुस्तकालय है, जहां सभी बच्चे बड़ी आसानी से बैठकर एक साथ पढ़ाई कर सकते हैं।

विद्यालय की भूमिका

विद्यार्थी के जीवन में विद्यालय की एक अहम भूमिका होती है। विद्यालय ही वह स्थान होता है, जहां से विद्यार्थी नियम, संयम शिष्टाचार स्वास्थ्य संबंधित सभी विषयों के बारे में सीखता है। स्कूल में आयोजित होने वाली तरह तरह की प्रतियोगिताओं से ही विद्यार्थी के कौशल और ज्ञान में वृद्धि होती है। मेरे विद्यालय में बच्चों को उन सभी नियमों के बारे में सिखाया जाता है, जो कि एक वास्तविक जीवन के लिए काफी महत्वपूर्ण है।

विद्यालय एक ऐसा स्थान है जो क्षमताओं को बढ़ावा देता है हमें अवधारणाएं सिखाता है। यहां होने वाले आयोजन हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाने का कार्य करते हैं। हमें अपनी संस्कृति से अवगत कराते हैं। विद्यालय ही हमें भौतिक व वास्तविक ज्ञान देकर भविष्य के लिए तैयार करता है। मुझे मेरे विद्यालय और विद्यार्थी जीवन से बहुत प्रेम है। यह वही जगह है, जहां मैंने दोस्ती जैसे बंधन का निर्माण होते देखा है। मुझे मेरा विद्यालय भवन अति प्रिय है और मुझे यहां आकर पढ़ाई करना बहुत पसंद है। मेरा विद्यालय हम सभी विद्यार्थियों का गौरव है, और हम इस महान संस्था में अध्ययन कर रहे हैं, यह हमारा सौभाग्य है।

my school essay in hindi (500 Words)

विद्यालय का छात्र के जीवन में एक अलग स्थान होता है। यहां बच्चों के जीवन निर्माण की नीव रखी जाती है। एक अच्छा विद्यालय सबसे अच्छे विद्यार्थियों का निर्माण करता है, जो भविष्य में अपने विद्यालय और देश का नाम रोशन करते हैं। बच्चों के उज्जवल भविष्य के निर्माण में विद्यालय और उनके शिक्षकों का काफी योगदान होता है। यहीं से देश के आने वाले नेता, साइंटिस्ट डॉक्टर, इंजीनियर तैयार होते हैं। विद्यालय में ज्ञान देने वाले शिक्षक हमारे जीवन के रचयिता होते हैं, वह हमें अच्छे जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।

मेरे विद्यालय का वर्णन

मेरे विद्यालय का नाम संत कबीरदास हाई स्कूल है। यह शहर से तकरीबन 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मैं प्रतिदिन पैदल ही स्कूल जाता हूं, कभी-कभी मेरे पिताजी ऑफिस जाते समय मुझे विद्यालय तक छोड़ देते हैं। विद्यालय भवन बहुत ही बड़ा है, इसमें लगभग 45 कमरे हैं और बच्चों के खेलने के लिए एक बड़ा खेल का मैदान भी है। मेरा विद्यालय सुबह 7:00 बजे से प्रारंभ होता है। जहां सभी बच्चे खेल के मैदान में खड़े होकर प्रार्थना में भाग लेते हैं। इसके बाद सभी बच्चे अपनी अपनी क्लास में पुनः लौट जाते हैं। मेरे विद्यालय में बड़ा पुस्तकालय है जहां बच्चों को पढ़ने की पूरी आजादी है इसके साथ-साथ विद्यालय में विज्ञान प्रयोगशाला खेल सामग्री नृत्य कक्षा जैसी कई कक्षाएं हैं। यहां का वातावरण हरियाली से भरा हुआ है और काफी साफ और स्वच्छ है। बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ शारीरिक विकास के लिए भी यहां कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। हर सप्ताह विद्यालय में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं होती है, जिसमें बच्चे अपने ज्ञान का प्रदर्शन करते हैं। मेरा विद्यालय शहर का सबसे अच्छा विद्यालय है और मुझे इसका विद्यार्थी होने पर गर्व है।

विद्यालय के प्रति हमारा कर्तव्य

विद्यालय को ज्ञान का मंदिर कहा जाता है। जहां बच्चे अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण ज्ञान अर्जित करता है, जिस तरह लोग भगवान के मंदिर का सम्मान करते हैं और उसे साफ रखते हैं। उसी तरह हमें भी हमारे विद्यालय का सम्मान करना चाहिए, और उसे साफ स्वच्छ रखना चाहिए। विद्यालय में शिक्षा दे रहे सभी शिक्षक हमारे लिए गुरु के समान होते हैं, हमें हमारे गुरु का सम्मान करना चाहिए। हमें विद्यालय के नियमों का पालन करना चाहिए और इसे आगे बढ़ाने में हमें अपना योगदान देना चाहिए। विद्यालय की गरिमा को बढ़ाना हमारा कर्तव्य होता है। विद्यालय से शिक्षा पूरी करने के बाद हमें अपने शिक्षक और विद्यालय को कभी भूलना नहीं चाहिए।

विद्यालय उसमें पढ़ने वाले सभी बच्चों की संपत्ति होती है, तथा उसका ध्यान रखना भी उन बच्चों का कर्तव्य होता है। विद्यालय सिर्फ पुस्तकीय ज्ञान का माध्यम नहीं है बल्कि वास्तविक जीवन का ज्ञान भी है हमें यही से प्राप्त होता है। यहां बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ अन्य प्रतियोगिताओं में आगे बढ़ने का अवसर दिया जाता है। बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद संगीत प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने का मौका दिया जाता है। जहां बच्चों के मानसिक विकास के साथ-साथ शारीरिक विकास पर भी काफी ध्यान दिया जाता है। यहां बच्चों को खेल-कूद, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने के अवसर दिए जाते हैं। जिससे बच्चों का मानसिक एवं शारीरिक विकास होती है। बच्चों को विद्यालय का पूरा लाभ उठाना चाहिए और अपनी पूरी निष्ठा से ज्ञान अर्जित करना चाहिए।  

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mera vidyalaya in hindi

हमारे सभी प्रिय विद्यार्थियों को इस mera vidyalaya in hindi जरूर मदद हुई होगी यदि आपको यह essay on school in hindi अच्छा लगा है तो कमेंट करके जरूर बताएं कि आपको यह my school essay in hindi कैसा लगा? हमें आपके कमेंट का इंतजार रहेगा और आपको अगला Essay कौन से टॉपिक पर चाहिए इस बारे में भी आप कमेंट बॉक्स में बता सकते हैं ताकि हम आपके अनुसार ही अगले टॉपिक पर आपके लिए निबंध ला सकें.

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My school essay in hindi मेरे स्कूल पर निबंध.

My School Essay in Hindi for students of class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 and 12. मेरे स्कूल पर निबंध और विद्यालय। Write My School Essay in Hindi font. My School Essay in Hindi is asked in every school exam question in all classes. Read and write My School Essay in Hindi in more than 300 words.

hindiinhindi My School Essay In Hindi

My School Essay in Hindi 200 Words

मेरे स्कूल का नाम गर्वरमेन्ट हाई स्कूल है। यह दिल्ली में स्थित है। मै स्कूल में बहुत कुछ सीखता हूँ। मैं कई अलग-अलग विषयों को सीखता हूँ। श्रीमती कल्पना मेरी प्रधानाचार्या है। | मेरे स्कूल में 25 कमरे है। सभी कमरें बहुत साफ और हवादार है मेरे स्कूल में 25 शिक्षक है। सभी शिक्षक बहुत ही सक्षम है। मेरे स्कूल में एक बड़ा पुस्तकालय, संगीत कक्ष, कम्प्यूटर लैब और एक बडे खेल का मैदान भी है। मेरे स्कूल में एक हजार और पॉच सौ छात्र है। मैं संगीत, नृत्य, कला, शिल्प जैसे अतिरिक्त पाठयक्रम गतिविधियों में भी भाग लेता हूँ। मुझे स्कूल में खेल के आधार पर खेलों में भाग लेना का अवसर मिलता है।

मै स्कूल की वॉलीबॉल टीम का हिस्सा हूँ। हमारे शिक्षक हमें बहुत देखभाल और धैर्य के साथ सिखाते है, और मैं शिक्षकों के लिए बहुत आभारी हूँ। स्कूल में मेरे पास बहुत अच्छे दोस्त है। हम एक साथ अध्ययन करते है, खेलते है, और खाते है। मेरे स्कूल के परिणाम हमेशा अच्छा होते है। मै अपने स्कूल से बहुत प्यार करता हूँ। मुझे अपने स्कूल पर गर्व है।

My School Essay In Hindi 250 Words

मेरे विद्यालय का नाम आदर्श विद्यालय है। यह विद्यालय नई दिल्ली में स्थित है। यह विद्यालय दिल्ली शहर का सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों में से एक है। मेरा विद्यालय शहर के प्रदूषण, धूल- धुआं और शोर – शराबों से बहुत अलग शांतिपूर्ण जगह पर स्थित है। मेरा विद्यालय बहुत अच्छा है जिसमें चार मंजिला भवन हैं। इस विद्यालय में नर्सरी से लेकर बारहवीं कक्षा तक की पढाई होती है। प्रत्येक कक्षा में दो सेक्सन (अनुभाग) हैं। विद्यालय में लगभग 40 कमरे हैं और विद्यालय के सभी कक्षा – फर्नीचर, पंखे आदि से सुसज्जित और हवादार हैं। विद्यालय में हमारे लिए खेलने के लिए एक बहूत बड़ा खेल का मैदान के साथ छोटा बगीचा भी है।

मेरे विद्यालय में लगभग पांच हजार विद्यार्थी पढ़ते हैं। अध्यापक – अध्यापिकाओं की संख्या चालीस है। विद्यालय के सभी अध्यापक – अध्यापिका बहूत अच्छे हैं और हमें बहूत अच्छे से पढ़ाते हैं। हमारे प्रधाना अध्यापक श्री विकास बहुत अच्छे और दयालु हैं। इनके अतिरिक्त दस अन्य स्टॉफ भी हैं। इनमें से दो क्लर्क दो माली एवं चार चपरासी हैं। दो चोकीदार भी है जो रात्रिकाल में विद्यालय की चौकीदारी करते हैं।

मेरे विद्यालय में संगीत कक्ष, विज्ञान प्रयोगशाला और कंप्यूटर कक्ष भी हैं। विद्यालय में अलग-अलग विषयों की पुस्तकों से भरा एक बड़ा पुस्तकालय है। जहाँ पर हम कभी – कभी जाकर खुद से पढ़ाई भी करते हैं। इस विद्यालय में बहुत सख्त अनुशासन है जिसे हमें नियमित आधार पर पालन करना पड़ता है। मुझे अपने विद्यालय पर बहुत गर्व है और मैं अपने विद्यालय का बहूत सम्मान करता हूँ।

My School Essay In Hindi 300 Words

मेरे स्कूल का नाम रोजरी स्कूल है, जो एक आदर्श विद्यालय है। तीन मंजिला ईमारत प्रभावपूर्ण ढंग से बना मेरा स्कूल बहुत ही शानदार हे जो शहर के बीचो बीच स्थित है। मेरा स्कूल मेरे घर से बहुत ही करीब है, जो बहुत ही शांतिपूर्ण दिखाई देता है। यहाँ का वातावरण शांत एवं मनोरम हे। मेरा स्कूल एक मंदिर के सामान है, जहा मई और मेरी बहन रोज सुबह प्राथना करने और पढ़ाई करने के लिए जाते है। प्रार्थना के स्टेज पर हमारे प्रधानाचार्य हमें प्रतिदिन प्रेरणादायक संदेश देते है। हमारे स्कूल के शिक्षक बहुत ही अच्छे है क्योकि वे हमे बहुत ही विनम्रता से पढ़ाते है। मुझे रोज स्कूल जाना अच्छा लगता है क्योकि मुझे पढ़ना बहुत ही पसंद है। मुझे बड़ा होकर डॉक्टर बनना है जिसके लिए मुझे खूब पड़ना होगा. मेरी माँ हमेशा मुझसे कहती हे की अच्छा डॉक्टर बनने के लिए अभी से ही सभी अनुसाशनो का पालन करना बहुत ही जरूरी है।

मेरे विद्यालय में दूसरी कक्षा से लेकर दसवीं कक्षा तक की पढ़ाई होती है। हर कक्षा के 2 – 3 सेक्शंस (अनुभाग) है। मेरे विद्यालय में लगभग पांच हजार विद्यार्थी पढ़ते है, जहा अद्यापको की संख्या लगभग 100 की है। हमारे स्कूल में पढ़ाई, यूनिफार्म और स्वछता को लेकर बहुत ही कड़े नियम है। हमारा स्कूल एक ज्ञान का मंदिर है, जहा मुझे हर रोज कुछ नया सीखने को मिलता है। पढ़ाई के इलावा हमे स्कूल मई अनुशासन, आचरण, समय-पालन और शिष्टाचार सीखने को मिलता है। स्कूल में पढ़ाई के इलावा हमे खेल-कूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर प्राप्त होता है। हमारे स्कूल के सभी छात्र-छात्राऐं सभी कार्यक्रमों जैसे की बाल दिवस, गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, शिक्षक दिवस में भाग लेते है।

इसलिये मेरा स्कूल दुनिया का सबसे बेहतरीन स्कूल है। मुझे अपने विद्‌यालय पर गर्व का अनुभव होता है।

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मेरा विद्यालय पर निबंध । Essay on My School in Hindi

by StoriesRevealers | May 14, 2020 | Essay in Hindi | 0 comments

Essay on My School in Hindi

Essay on My School in Hindi : मेरा स्कूल 4 मंज़िल इमारत का है। मैं जिस शहर में रहता हूं, उसमें यह सबसे अच्छे स्कूलों में से एक है। इसे सुंदर लाल रंग में चित्रित किया गया है। इसमें एक अद्भुत, पुराने विक्टोरियन स्टाइल का बुनियादी ढाँचा है। यह अपने पिछले प्रसिद्ध छात्रों के लिए पूरे देश में जाना जाता है। मेरा विद्यालय अपनी शैक्षिक और पाठ्येतर उपलब्धियों के लिए जाना जाता है।

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हमारा विद्यालय उन सभी सुविधाओं से सुसज्जित है जो भी छात्रो को चाहिए होता है। यह बौद्धिक रूप से सीखने और बढ़ने के लिए एक अद्भुत जगह है। शिक्षक ईमानदार और दयालु हैं। 10 लैब असिस्टेंट के साथ कुल मिलाकर 80 शिक्षक हैं। मेरे स्कूल में 2 विज्ञान प्रयोगशालाएं, 2 कंप्यूटर लैब, एक संगीत कक्ष और एक नृत्य कक्ष है। एक कला वर्ग भी है। प्रयोगशालाएं कला वर्ग के साथ पहली मंज़िल पर स्थित हैं, जबकि संगीत कक्ष भूतल पर है। डांस रूम दूसरी मंज़िल पर है। बच्चों के पीने के लिए स्कूल में आरओ के साथ वाटर कूलर भी हैं। शौचालय से पानी और साफ सफाई कि सुविधा सुचारु रूप से है।

Essay on My School in Hindi

Essay on My School in Hindi

छात्रों और शिक्षकों के बीच एक करीबी रिश्ता है। बीमार होने वाले छात्रों के लिए भी एक सूचना है। बीमार छात्रों के इलाज के लिए एक नर्स मौजूद है। भूतल में स्वागत कक्ष और प्रधानाचार्य कार्यालय शामिल हैं। शिक्षकों के आराम करने के लिए प्रत्येक मंज़िल पर दो स्टाफ रूम हैं। आमतौर पर दो छोटे ब्रेक और एक लंच ब्रेक होता है।

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छोटे ब्रेक आमतौर पर 5 मिनट के होते हैं। लंच ब्रेक 25 मिनट का होता है। ब्रेक के दौरान छात्र और शिक्षक अपना दोपहर का भोजन करते है। छात्र खेल के मैदान में जाते हैं और अपने दोपहर के भोजन का उपभोग करते हैं, अपनी कक्षाओं में बैठते हैं या कैंटीन जाते हैं। मेरे स्कूल में खेलने के लिए झूले, स्लाइड, और लटकरे के लिए एक बार भी है। स्कूल परिसर में बास्केटबॉल कोर्ट के साथ-साथ फुटबॉल कोर्ट भी है। इसमें छात्रों के बैठने और मौज करने के लिए एक विशाल लॉन भी है। स्कूल के बगीचे में सुंदर सुंदर किस्म के फूल मौजूद हैं। यह माली द्वारा नियमित रूप से प्रबंधित किए जाते है। स्कूल की संपत्ति लगभग 1 एकड़ भूमि में फैली हुई है।

जब यहर शिक्षाविदों और पाठ्येतर गतिविधिया होती है, तो छात्रों के बीच बहुत प्रतिस्पर्धा होती है। स्कूल में लगभग 1500 छात्र भर्ती हैं। छात्रों का एक दूसरे के साथ बहुत अच्छी तरह मेल जोल है। विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले बच्चों के लिए स्कूल द्वारा परिवहन सेवा भी प्रदान की जाती है। गर्मी के मौसम में सुबह 7.30 से दोपहर 2 बजे और सर्दियों के मौसम में सुबह 8 से दोपहर 2.30 बजे तक चलता था। 

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मेरे स्कूल में एक बहुत ही अच्छा वातावरण है जो हर दिन स्कूल में आने के मुझे प्रोत्साहित करता है। शिक्षक विद्यार्थियों को नई शिक्षण सामग्री और बच्चों को हर दिन कुछ नया करने के लिए प्रेरित करते रहते हैं। ऐसे कई क्लब हैं जिनमें बच्चे शामिल हो सकते हैं और नई चीजें सीख सकते हैं जैसे कि शतरंज क्लब, डिबेट क्लब, एनसीसी और कई अन्य। मेरा विद्यालय विश्व का सर्वश्रेष्ठ स्थान है।

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Aapne school par nibandh Bahut sahi se likha hai. Thank You

Excellent Works.

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Nibandh

मेरी पाठशाला पर निबंध

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रुपरेखा : प्रस्तावना - मेरा पाठशाला - मेरे पाठशाला के बारे में - मेरे पाठशाला की प्राचार्य कक्ष - मेरे पाठशाला की पुस्तकालय - मेरे पाठशाला के शिक्षक - मेरे पाठशाला में खेल - पाठशाला के प्रति हमारा कर्तव्य - उपसंहार।

मनुष्य अपने जीवन में कुछ-न-कुछ सीखता है। कोई भी मनुष्य जन्म से ही ज्ञानी नहीं होता है बल्कि इस धरती पर आकर ही किसी भी विषय पर ज्ञान प्राप्त करता है। मानव जीवन को सभ्य बनाने में सबसे बड़ा योगदान पाठशाला का होता है। पाठशाला का अर्थ होता है जिस स्थान पर ज्ञान का वास हो। मैं भी शिक्षा ग्रहण करने के लिए सेंचुरी पाठशाला में जाता हूँ। मेरे पाठशाला में सभी जाति, धर्म और वर्ग के बच्चे पढने आते हैं। पाठशाला शासकीय और अशासकीय दोनों प्रकार के होते हैं। हमारा पाठशाला एक मंदिर के समान है जहाँ हम रोज पढने आते है ताकि अपने जीवन में उज्ज्वल भविष्य प्राप्त कर सके। हमारे पाठशाला में सभी को एक समान दर्जा दिया जाता है। हमें प्रतिदिन पाठशाला जाना बहुत ही अच्छा लगता है क्योंकि पाठशाला एक ऐसा स्थान है जहाँ पर हमें प्रतिदिन कुछ-न-कुछ नया सीखने को मिलता है। सही शिक्षा से ही किसी भी बच्चे का भविष्य निश्चित होता है और सही शिक्षा की शुरुवात पाठशाला से ही होती है।

मेरा पाठशाला तीन मंजिला का है। हमारा पाठशाला हमारे लिए एक मंदिर के समान है। हमारा विद्यालय यूको बैंक से आधे किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हमारे पाठशाला को प्रदूषण, शोर, गंदगी और धुएं से दूर सुरक्षित स्थान पर बनाया गया है जिससे बच्चे शांतिपूर्ण वातावरण में मन लगाकर पढ़ सकें। हमारे पाठशाला में बहुत से पेड़ हैं जिनकी छाया में बच्चे लंच के समय एक-साथ बैठकर टिफ़िन खाते हैं। इन पेड़ों को एक पंक्ति में लगाया गया है। छोटे बच्चों के खेलने के लिए झूलों का भी प्रबंध किया गया है। हमारे पाठशाला सभी विद्यार्थियों के पढने के लिए एक पुस्तकालय का भी निर्माण किया गया जिसमें विद्यार्थी निश्चिंत होकर अध्धयन कर सकते हैं। हमारे पाठशाला में एक बहुत बड़ा क्लब हाउस है जहाँ पर कार्यक्रम होते है। हमारे पाठशाला में एक बड़ा-सा मैदान भी है जहाँ रोज हमे खेलने के लिए ले जाया जाता है।

हमारा पाठशाला सुबह के समय पर होता है। पाठशाला में सबसे पहले प्रार्थना होती है। प्राथना होने के बाद हम अपने क्लास टीचर को सुभ नमस्कार करते हैं। हमारे पाठशाला में बहुत ही सख्ती से अनुशासन का पालन किया जाता है। बच्चों को घरों से पाठशाला तक पहुँचाने के लिए पीले रंग की बस की सुविधा की गई है। सभी बच्चों को अनुशासन में रखने के लिए एक समान वर्दी दिया गया है जिसे पहनना अनिवार्य है।

हमारे पाठशाला में हमारी जरूरत की सभी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं। विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटर लैब, दो विज्ञान लैब, एक पुस्तकालय, खेलने का मैदान, कार्यक्रम के लिए सुंदर क्लब आदि की सुविधाएँ उपलब्ध हैं। हमारे स्कुल में नर्सरी से लेकर दसवीं कक्षा तक के विद्यार्थी पढ़ते हैं।

हमारे पाठशाला में पुरुष और महिलाओं सहित 35 शिक्षक, 15 सहायक और एक प्रधानाचार्य जी हैं। मेरे पाठशाला में 20 शिक्षक हैं जिन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा किये है। हमारे विद्यालय में सभी शिक्षकों का केवल एक ही लक्ष्य होता है बच्चों का उज्ज्वल भविष्य प्राप्त करने में सहायता कर सके। हमारे विद्यालय में सभी विषय पर बहुत गंभीरता से विचार विमर्श किया जाता है तथा विद्यार्थियों के उचित और अनुचित को सर्वप्रथम रखा जाता है। हमारे विद्यालय में बच्चों को बहुत से विषयों पर शिक्षा दी जाती है। हमारे विद्यालय में प्रत्येक छात्र को कोई भी संदेह होने पर वह अपने कक्षा के अध्यापक से प्रश्न पूछ सकते है और अध्यापक भी उसके प्रश्नों का उत्तर बहुत ही विनम्र और प्रेम भाव से देते हैं जिससे की विद्यार्थी को सरलता से समझ आ सके।

हमारे पाठशाला में प्राचार्य महोदय के लिए एक अलग कक्ष है। अपने कक्ष में बैठे ही प्राचार्य महोदय सारे पाठशाला में चल रही गतिविधियों को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं। इस कक्ष में कक्षा समय सारिणी और अध्यापक समय सारिणी भी दीवार पर लटकी हुई है। इस कक्ष में महापुरुषों तथा प्रेरक उद्धरण के चित्र भी दीवार पर सजे हुए हैं।

इस कक्ष में सभी अध्यापक एक साथ-मिलकर बच्चों के भविष्य और नयी गतिविधियों के बारे में विचार विमर्श करते हैं। किसी भी निर्णय को लेने से पहले सभी अध्यापक प्रधानाचार्य से विचार विमर्श अवश्य करते हैं। अगर कोई बच्चा किसी दूसरे बच्चे को परेशान करता है तो सबसे पहले प्रधानाचार्य को पता चलता है और उस बच्चे को उचित प्रकार से समझाया जाता है जिससे वह इस गलती को दुबारा न दोहरा सके। सभी प्रकार की गतिविधियाँ प्रधानाचार्य के देख-रेख में होता है।

हमारे पाठशाला में एक बहुत ही विशाल पुस्तकालय है। इसमें नर्सरी से लेकर दसवीं कक्षा तक की विभिन्न विषयों की पुस्तकें हैं। इस पुस्तकालय में हिंदी के दैनिक समाचार पत्र और कई महत्वपूर्ण मासिक अर्धवार्षिक और वार्षिक पत्रिकाएँ भी आती है। पुस्तकालयाध्यक्ष बहुत ही परिश्रमी और अच्छे व्यक्ति हैं। हमें पुस्तकालय से हमारी जरूरत की प्रत्येक पुस्तक मिल जाती है जिसे घर भी ले जाया जा सकता है। पुस्तकालय से पुस्तक को केवल कुछ निश्चित समय के लिए ही घर पर ले जाने की अनुमति मिलती है।

हमारे पाठशाला के अध्यापक बहुत ही परिश्रमी विद्वान् और छात्रों के हित का ध्यान रखने वाले अध्यापक हैं। हमारे पाठशाला के अध्यापक बहुत ही परिश्रम और लगन से सिलेबस के अनुसार पढ़ाते हैं और साथ ही लिखित कार्य का भी अभ्यास कराते हैं। सभी अध्यापक हमारे लिखित कार्य को बहुत ही सावधानीपूर्वक देखते हैं और हमारी अशुद्धियों की ओर हमारा ध्यान दिलाते हैं। इससे हमें शुद्ध भाषा सीखने और उसका शुद्ध प्रयोग करने में सहायता मिलती है। हमारे पाठशाला के अध्यापक बहुत ही दयालु हैं जो हमें अनुशासन का अनुसरण करना सिखाते हैं। हमारे शिक्षक हमेशा हमें खेल क्रियाओं, प्रश्न उत्तर प्रतियोगिता, मौखिक-लिखित परीक्षा, वाद-विवाद, समूह चर्चा, आदि दूसरी क्रियाओं में भाग लेने के लिए भी प्रेरित करते हैं। हमारे पाठशाला के अध्यापक हमें पाठशाला में अनुशासन को बनाए रखने और पाठशाला परिसर को साफ और स्वच्छ बनाए रखने के लिए प्रेरित करते हैं। सचमुच हमारे पाठशाला के शिक्षक बहुत अच्छे है।

हमारे पाठशाला में एक बड़ा-सा मैदान है। हमारे पाठशाला में खेल कूदों जैसे गतिविधियों पर बहुत महत्व दिया जाता है। सभी विद्यार्थियों के लिए खेल में भाग लेना अनिवार्य होता है जिस कारन पाठशाला के विद्यार्थी खेल में बहुत रूचि लेते हैं। हमारे पाठशाला के खिलाडी कई खेलों में पुरस्कार भी प्राप्त किये है। हमारे पाठशाला में बहुत सी खेल प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं जिससे वह अपने शारीरिक और मानसिक विकास में वृद्धि कर सके। जिस प्रकार से पढाई मनुष्य के भविष्य के लिए बहुत जरूरी होती है उसी प्रकार खेल भी मनुष्य के लिए बहुत जरूरी होते हैं। खेलों से मनुष्य बहुत कुछ जान पाता है तथा अपने पाठशाला का नाम को रोशन करने हेतु अपना योगदान देते है।

पाठशाला एक विद्या का मंदिर होता है जहाँ मनुष्य ज्ञान प्राप्त करता है। जिस तरह भक्तों के लिए मंदिर और पूजा स्थल पवित्र स्थान होता है उसी तरह से एक विद्यार्थी के लिए उसका विद्यालय एक पवित्र स्थल होता है। इस पवित्र मंदिर के भगवान हैं हमारे शिक्षक जो हमारे अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर हमारे मन में ज्ञान रूपी प्रकाश को फ़ैलाने में मदत करते है। इसी लिए हमें अपने शिक्षकों का सम्मान करना चाहिए तथा उनके कहने के अनुसार अपने शिक्षण कार्य का संपादन करना चाहिए। हमें अपने विद्यालय के नियमों का श्रद्धा के साथ पालन करना चाहिए। हमारा कर्तव्य बनता है की जब तक हम पाठशाला में है तब तक हमें उचित ज्ञान प्राप्त करनी चाहिए तथा अपने शिक्षकों को सम्मान देना चाहिए। पाठशाला जीवन समाप्त होने के बाद भी हमे अपने शिक्षक एवं पाठशाला को भूलना नहीं चाहिए। जब मौका मिले या जब हम अपने कामों से मुक्त रहे तो हमें अपने पाठशाला अपने शिक्षक से भेट करने जाना चाहिए जो कि मैं भविष्य में अवश्य जाऊँगा।

पाठशाला एक सार्वजनिक संपत्ति होती हैं। यह हमारी राष्ट्रिय निधि है, इसलिए विद्यार्थी को इसकी रक्षा के लिए हमेशा जागरूक रहना चाहिए। पाठशाला सिर्फ पुस्तकीय ज्ञान का माध्यम नहीं है बल्कि ज्ञान प्राप्ति के हर अवसर वहाँ पर उपलब्ध होते हैं। पाठशाला बालकों को खेल-कूद, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर देता है जिससे बालकों का मानसिक एवं शारीरिक विकास होती है। उन्हीं विषयों के मार्ग दर्शन के लिए शिक्षक होते हैं इसलिए विद्यार्थी को अपने स्कूलों से पूरा लाभ उठाना चाहिए। पाठशाला हमें हर प्रकार के ज्ञान का प्रकाश मिलता है। इसीलिए हमारा पाठशाला हर तरह से प्रेणादायक भूमिका निभाती है। इसीलिए मुझे मेरा पाठशाला बहुत प्रिय है।

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Hindi Essays - हिंदी भाषा में हिंदी निबंध लेखन.

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My School essay in Hindi | मेरी पाठशाला निबंध हिंदी में।

नमस्कार दोस्तों हर व्यक्ति के जीवन में पाठशाला का एक अलग ही स्थान होता है इसीलिए तो हमारे जीवन में हम पाठशाला की कितनी सारी मजेदार यादो के साथ जीते है। और मजे की बात यह है की पाठशाला में मेरी पाठशाला पर एक हिंदी निबंध हमेशा होता है। आज Hindi Essays मेरी पाठशाला इस विषय पर हिंदी निबंध लेकर आया है।

This iamge is of school and is been used for hindi essay on my school

मेरी पाठशाला। (My School).

मेरी पाठशाला का नाम "सरस्वती विद्यालय" है। मेरी पाठशाला कोल्हापुर में स्थित है और यह पाठशाला बहुत बड़ी है। मेरी पाठशाला की इमारत तीन मंजिली है और उसमें पहली से लेकर 10वीं तक हर कक्षा के लिए 4 वर्क है। उसी के साथ एक बड़ा सभागृह है, वाचनालय है और लेबोरेटरी है उसी के साथ बच्चों को खेलने के लिए एक बड़ा सा मैदान है और पाठशाला की इस मैदान में एक छोटी सी बाग है जिसमें अलग-अलग प्रकार के पौधे लगाए गए है ऐसी हमारी बड़ी पाठशाला है।

हमारे पाठशाला का एक ही गणवेश है और पाठशाला के सभी विद्यार्थी वही गणवेश पहनते है। हमारे विद्यालय के सहारे शिक्षक काफी अच्छे है और वह हमें हमारे हर कार्य में मदद करते है और पाठशाला की पढ़ाई पूरी तरीके से पाठशाला में ही करवा लेते है।

पाठशाला की दूसरी मंजिल पर एक बड़ा वाचनालय है जहां पर बहुत ज्यादा शांति होती है वाचनालय में सभी प्रकार के पुस्तकें बच्चों के लिए उपलब्ध है। वाचनालय में बहुत सारी पुस्तक है जिसमें से मुझे कहानियों के पुस्तक काफी पसंद है। वाचनालय से थोडी दूर एक बड़ी लेबोरेटरी है जहां पर हमें अलग-अलग प्रयोग दिखाए जाते है मुझे यह प्रयोग सीखने में काफी अच्छा लगता है।

हर साल जब भी 10वीं का निकाल लगता है तभी हमारे पाठशाला का नाम हमेशा सबसे ऊपर रहता है। हमारे पाठशाला के विद्यार्थी सिर्फ पढ़ाई में ही अच्छे नहीं है तो खेलकूद में भी वह सबसे आगे है। हमारी क्रिकेट टीम इसी साल नेशनल लेवल क्रिकेट कंपटीशन खेल कर आइ है और यह बात पर हमें बहुत ज्यादा गर्व है।

ऐसी हमारी पाठशाला है। मुझे मेरी पाठशाला का बहुत ज्यादा अभिमान है। छुट्टी होने पर भी मुझे मेरी पाठशाला में जाने का मन होता है ऐसी मेरी पाठशाला मुझे बहुत प्रिय है।

समाप्त।

तो दोस्तों आपकी पाठशाला कैसे है और उसका नाम क्या है हमें नीचे comment करके जरूर बताएं।

मेरी पाठशाला पर यह हिंदी निबंध class १,२,३,४,५,६,७,८,९ और १० के विद्यार्थी अपनी पढ़ाई के लिए इस्तमाल कर सकते है। उसी के साथ यह निबंध नीचे दिए गए विषयों पर भी इस्तमाल किया जा सकता है।

  • मेरा विद्यालय।
  • पाठशाला।
  • अधर्ष विद्यालय
  • मेरी स्कुल

तो दोस्तों आपको यह हिंदी निबंध कैसा लगा उसी के साथ अगर आपको कोई और विषय पर हिंदी निबंध चाहिए तो हमें नीचे comment करके जरूर बताएं।

धन्यवाद।

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एक टिप्पणी भेजें, 19 टिप्पणियाँ.

my school essay hindi

Mujhe Meri Pathshala SANJEEVAN ke bare mein Janna hai

my school essay hindi

Ok, hm jaldhi yah nibandh lekar ayenge.

Meri pathshala ka nama hai shri vimleshwar vidyalay bemble hai

Waha ye to bahut hi achi bat hey, :)

My school name is st soldier divine public school in khambre

Meri pathashala ka nam excellence hai

The what? Please complete you question so that I can solve your query. Thank you :)

P.dr.Vitthalrao eknathrao likhe patil vidyalaya babhaleshawar tal.rahata. dist .Ahmednagar. state . Maharastra

Very helpful thank you

We are happy that this essay helped you :)

Mount Carmel High school

शारदा विद्या मंदिर,राहाता तालुका राहाता जिल्हा अहमदनगर

बहुत ही अच्छी बात आहे.

my school essay hindi

pathshala nibandh me bahut achhi information share kiya hai aapne, thank you

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What to Know About Holi, India’s Most Colorful Tradition

The ancient festival has Hindu roots, but growing numbers worldwide are taking part in the celebration, which features bonfires, singing, dancing, prayer, feasting and clouds of pigmented powder.

Celebrants are covered in red and pink hues outside a temple.

By John Yoon and Hari Kumar

A rainbow haze swirls through India, where raucous laughter rings out as friends and strangers douse one another with fists full of pigmented powder. It is time for the ancient Hindu tradition of Holi, an annual celebration of spring.

In 2024, crimson, emerald, indigo and saffron clouds will hover over the country on March 25 for one of its most vibrant, joyful and colorful festivals.

“Playing Holi,” as Indians say, has spread far beyond India’s borders.

The revelry starts at sundown.

Holi (pronounced “holy”), also known as the “festival of colors,” starts on the evening of the full moon during the Hindu calendar month of Phalguna, which falls around February or March.

It begins with the kindling of bonfires. People gather around the flames to sing, dance and pray for an evening ritual called Holika Dahan, which re-enacts the demise of a Hindu demoness, Holika.

All sorts of things are thrown into the fires, like wood, leaves and food, in a symbolic purge of evil and triumph of good.

From Delhi, Archie Singhal, 24, visits her family in Gujarat the day before Holi, when the fire is lit in the evening. The next morning, she prepares for the bursts of powder, called gulal, by applying oil on her body so the colors don’t stick to her skin. She puts on old clothes she doesn’t mind tossing.

Why the colors?

Holi’s roots are in Hinduism. The god Krishna, cursed by a demon with blue skin, complained to his mother, asking why his love interest Radha is fair while he is not. His mother, Yashoda, playfully suggests that he paint Radha’s face with any colors he wishes. So Krishna smears color on her so they look alike.

Holi is in part a celebration of the love between Krishna and Radha that looks past differences. Today, some of the gulal used during Holi is synthetic. But the colors traditionally come from natural ingredients, such as dried flowers, turmeric, dried leaves, grapes, berries, beetroot and tea.

“There is an environment of freedom,” Ms. Singhal said, adding that she doesn’t hesitate to throw colors on her younger brother, parents, aunts, uncles and neighbors.

Everyone takes part.

The ancient Hindu festival eschews the religious, societal, caste and political divisions that underpin India’s often sectarian society . Hindu or not, anybody can be splashed with brightly colored dust, or even eggs and beer.

Some partake in worship, called puja, offering prayers to the gods. For others, Holi is a celebration of community. The festival gets everyone involved — including innocent passers-by.

“People forget their misunderstandings or enmity during this occasion and again become friends,” said Ratikanta Singh, 63, who writes, sometimes about Holi, in Assam, in northeastern India.

There’s a feast.

When not throwing around gulal, friends, families and neighbors partake in a buffet of traditional dishes and drinks. They include gujiya, dumpling-like fried sweets filled with dried fruits and nuts; dahi vada, deep-fried lentil fritters served with yogurt; and kanji, a traditional drink made by fermenting carrots in water and spices.

Some celebrate Holi with thandai, a light green concoction of milk, rose petals, cardamom, almonds, fennel seeds and other ingredients. For thousands of years, the drink has sometimes been laced with bhang, or crushed marijuana leaves, which add to the mood of revelry.

Holi has ancient roots.

Holi has been documented for centuries in Hindu texts. The tradition is observed by people young and old, particularly in Northern India and Nepal, where the stories behind the festival originated.

Holi also marks the harvesting of crops with the arrival of spring in India, where more than half of the population lives in rural areas.

Traditions vary across India.

Holi celebrations are as diverse as the Indian subcontinent. They are particularly wild in North India, considered the birthplace of the Hindu god Krishna, where celebrations can last more than a week.

In Mathura, a northern city where Krishna is said to have been born, people recreate a Hindu story in which Krishna visits Radha to romance her, and her cowherd friends, taking offense at his advances, drive him out with sticks.

In the eastern state of Odisha, people hold a dayslong festival called Dola Purnima . Grand processions of people shouldering richly decorated carriages with idols of Hindu gods are a large part of the festivities there. The processions are full of drumbeats, songs, colorful powder and flower petals thrown into the air.

In southern India, where Holi is not celebrated as widely, many temples carry out religious rites. In the Kudumbi tribal community, in the southwest, temples cut areca palms and transport their trunks to the shrine in a ritual that symbolizes the victory good over evil.

It’s not just in India.

Holi is celebrated around the world, wherever the Indian diaspora has gone. More than 32 million Indians and people of Indian origin are overseas, most in the United States, where 4.4 million reside, according to the Indian government.

It is also widely enjoyed in countries as varied as Fiji, Mauritius, South Africa, Britain and other parts of Europe.

Holi is known as Phagwah in the Indian communities of the Caribbean, including in Guyana , Suriname and Trinidad and Tobago.

The festival has also been used by the Indian government to project soft power and reshape its image as part of its “ Incredible India ” tourism campaign.

On Holi, “the world is a global village,” said Shubham Sachdeva, 29, from an eastern Delhi suburb, who added that his friends in the United States were celebrating Holi with their roommates whether they were Indian or not. “All this brings the world close to each other.”

An earlier version of a picture caption with this article misstated the location of a Holika Dahan celebration. It was in Durban, South Africa, not India.

How we handle corrections

John Yoon is a Times reporter based in Seoul who covers breaking and trending news. More about John Yoon

Hari Kumar covers India, based out of New Delhi. He has been a journalist for more than two decades. More about Hari Kumar

Hindi Grammar by Sushil

मेरा स्कूल पर निबंध | Essay on My School in Hindi

Essay on My School in Hindi ; विद्यालय का मतलब विद्या का मंदिर होता है यह एक ऐसा स्थान है जहां आपको शिक्षा मिलती है हमारे संस्कारों में विद्या को देवी का दर्जा दिया जाता है और स्कूलों को मंदिर का दर्जा दिया जाता है हर स्कूल में बच्चों को इस पर निबंध लिखने को दिया जाता है शिक्षा ग्रहण करने के लिए हमें अपना आधा समय स्कूल यानी विद्यालय में ही व्यतीत करते हैं जिससे हमारी कई यादें जुड़ी होती हैं

दोस्तों आप सभी ने अपने स्कूल समय में मेरा विद्यालय पर निबंध तो जरूर ही लिखा होगा लेकिन आपने यह भी देखा होगा कि आपका निबंध सही होने पर भी आपको पूरे अंक नहीं दिए जा रहे हैं वह केवल इसलिए क्योंकि आप लिखने का तरीका और फॉर्मेट सही नहीं होगा आज हम आपको अपने आर्टिकल के जरिए यह बताएंगे कि कैसे आप मेरा विद्यालय पर लाइन के अनुसार और शब्दों के अनुसार निबंध लिख सकते हैं और अपने स्कूल में एक इस निबंध को पढ़कर अच्छी परफॉर्मेंस दे सकते हैं

मेरा स्कूल पर निबंध | Essay on My School in Hindi

Table of Contents

मेरा स्कूल पर 100 शब्दों का निबंध :-

विद्यालय अर्थात विद्या का हाल है या घर मतलब वह स्थान जहां विद्या उपार्जन होता हो हमारे संस्कार में विद्या को देवी का स्थान दिया गया हर विद्यालय को मंदिर की उपमा दी गई है मेरा विद्यालय एक ऐसा विषय है जिस पर अक्सर ने बना दी लिखने को दिया जाता रहता है हमारी जिंदगी का सबसे अहम समय हमने अपने विद्यालय में ही बिताया हैं

मेरे विद्यालय का नाम बाल निकेतन है यह शहर की भीड़ – भाड़ से दूर बेहद शांत माहौल में विद्यमान है इसके चारों ओर हरियाली ही हरियाली है जिस कारण वातावरण शुद्ध रहता है और हमें शुद्ध वायु भी मिलती है मेरा विद्यालय मेरे घर से थोड़ी ही दूरी पर है मेरे विद्यालय का व्यास बहुत बड़ा है इसके चारों तरफ सुंदर-सुंदर फूलों की क्यारियां लगी है

विद्यालय और शिक्षा हमारे जीवन में किस प्रकार से महत्व रखती है यह आपको निबंध की सहायता से बताया गया है विद्यालय पर निबंध लिखने से पूर्व आपको अपने विद्यालय की छवि अपने सामने रखनी चाहिए इससे आपको निबंध लिखने में सहायता होगी

मेरा स्कूल पर 250 शब्दों का निबंध :-

मेरे विद्यालय की बाउंड्री वाल बहुत ऊंची है ताकि कोई बाहर का अज्ञात व्यक्ति बिना किसी परमिशन के अंदर ना आ सके हमारे विद्यालय में कुल 20 क्लासरूम है जिसमें 18 रूम हमारे विद्यालय के लिए छात्रों को पढ़ने के लिए और एक हमारे अध्यापकों को बैठने व कार्य करने के लिए और एक अन्य हमारे प्रधानाचार्य जी के लिए है

हमारे विद्यालय में एक बहुत बड़ा खेल का मैदान है जहां पर हम सभी छात्र छात्राएं खेलते हैं और साथ-साथ शारीरिक व्यायाम भी करते हैं और यहां पर हमारी एक योगा क्लास भी चलती है

हमारे विद्यालय में पूरे 600 विद्यार्थी 11 अध्यापक और एक प्रधानाचार्य और दो गार्डन काल है हमारे विद्यालय में 3 शौचालय है जिसमें 1 छात्रों के लिए तथा एक छात्राओं के लिए और एक अध्यापकों के लिए है हमारे विद्यालय में साफ सफाई का विशेष ध्यान दिया जाता है

हमारे विद्यालय का वातावरण बहुत ही साफ रहता है और यहां का शासन बहुत ही व्यवस्थित है अगर विद्यालय का कोई बच्चा शासन तोड़ता है तो उसे प्रधानाचार्य द्वारा सजा दी जाती है हमारा विद्यालय खेलकूद, डांस , मनोरंजन, ड्रामा इन सभी क्षेत्रों में बच्चों को प्रेरित करता है

मेरा स्कूल पर 300 शब्दों का निबंध :-

विद्यालय शिक्षा का द्वारा होता है जो हमें सफलता की ओर ले जाता है यह भविष्य के लिए युवा उज्जवल दिमाग को प्रशिक्षण मार्गदर्शन और तैयार करने में मदद करते हैं सबसे अच्छा स्कूल हमेशा सर्वश्रेष्ठ छात्रों का निर्माण करता है मेरा स्कूल भी मेरे क्षेत्र के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित स्कूलों में से एक हैं

मेरा विद्यालय मेरे क्षेत्र के सबसे पुराने विद्यालयों में से एक है शिक्षा के क्षेत्र में इसका बहुत अच्छा और सफल इतिहास रहा है मेरा स्कूल मेरे घर पर काफी करीब है मैं अक्सर पैदल ही अपने स्कूल जाता हूं लेकिन कभी-कभी मेरे पिता अपने ऑफिस जाते समय मुझे स्कूल छोड़ देते हैं

मेरे विद्यालय में एक विस्तृत खेल का मैदान और एक सुंदर उद्यान के साथ एक सुंदर इमारत है | मैं हमेशा अपने स्कूल समय पर पहुंचता हूं सभा में भाग लेने के बाद सभी विद्यार्थी अपनी अपनी कक्षा में चले जाते हैं | मेरे शिक्षक बहुत ही दयालु है |

वह हमें देखभाल और प्यार से सिखाते हैं मेरे क्लास फेलो बहुत सावधान है यह सभी पढ़ाई में एक दूसरे की मदद करते हैं मेरा स्कूल अनुशासन का सख्ती से पालन करता है हमारे स्कूलों में विभिन्न सेमिनार और कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं छात्रों को उन सभी आयोजन में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है

मेरा स्कूल पर 500 शब्दों का निबंध :-

प्रस्तावना :-.

विद्यालयों को प्राचीन काल से ही मंदिरों का दर्जा दिया गया है प्राचीन काल में बालक 68 अथवा 11 वर्ष की अवस्था में गुरुकुल ओ अथवा विद्यालय में ले जाए जाते थे और वे गुरु के पास बैठकर ब्रह्मचारी के रूप में शिक्षा प्राप्त करते थे गुरु उनके शारीरिक और बौद्धिक संस्कारों को पूर्ण करता हूं हुआ उन्हें सभी शास्त्रों एवं उपयोगी विद्याओं के शिक्षा देता था अंत में दीक्षा देकर उन्हें विवाह कर गृहस्थ आश्रम के विविध कर्तव्यों का पालन करने के लिए वापस भेजता था वर्तमान के विद्यालय प्राचीन काल के गुरुकुल से बहुत अलग अवश्य है किंतु आज भी विद्यालयों को मंदिर और अध्यापकों को भगवान का दर्जा दिया जाता है

विद्यालय स्थल :-

मेरा विद्यालय बहुत सुंदर है और मुझे मेरा विद्यालय बहुत अच्छा लगता है मेरा विद्यालय मेरे घर से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है इसलिए हमारे विद्यालय से एक पीले रंग की स्कूल बस रोज सुबह 8:00 बजे समय पर मेरे घर के सामने मुझे लेने के लिए आती है और मेरी माता जी रोज मुझे बस में बिठा कर स्कूल भेजती हैं

मेरा विद्यालय शहर की भीड़भाड़ से दूर एकांत स्थल पर है प्राचीन काल से ही विद्यालयों के लिए ऐसे स्थान कोपर तो समझा जाता था जहां पर किसी भी प्रकार का सोना क्योंकि पढ़ाई के लिए शांति की आवश्यकता होती है मेरा विद्यालय बहुत बड़ी जगह में फैला हुआ है इसके चारों ओर ऊंची ऊंची दीवारें हैं

विद्यालय परिसर :-

मेरे विद्यालय के पीछे की ओर एक बहुत बड़ा मैदान है जिसमें हम सभी विद्यार्थी खेलकूद का आनंद लेते हैं यहीं पर हमारा प्रार्थना स्थल है जहां पर हम सुबह प्रार्थना करते हैं और अपने दिन की शुरुआत करते हैं विद्यालय के मैदान के चारों और बड़े-बड़े वृक्ष लगे हुए हैं और छोटी-छोटी घास लगी हुई है विद्यालय परिसर में कई छोटी-छोटी बटिकाए भी हैं जिनमें रंग बिरंगे फूल खिलते हैं इससे हमारे विद्यालय का वातावरण बहुत ही अच्छा रहता है और यह देखने में भी बहुत सुंदर लगता है ।

मेरे स्कूल के शिक्षक :-

हमारे स्कूल के अध्यापक बहुत ही परेशानी विद्वान और छात्रों के हित का ध्यान रखने वाले अध्यापक हैं हमारे स्कूल के अध्यापक बहुत ही परिश्रम और लगन से सिलेबस के अनुसार पढ़ाते हैं साथ ही लिखित कार्य का भी अभ्यास कराते हैं सभी अध्यापक हमारे लिखित कार्य को बहुत ही सावधानी पूर्वक देखते हैं और हमारी अशुद्धियों की ओर हमारा ध्यान दिलाते हैं इससे हमें शुद्ध भाषा सीखने और उसका प्रयोग करने में सहायता मिलती है हमारे स्कूल के अध्यापक बहुत ही दयालु हैं जो हमें अनुशासन का अनुसरण करना सिखाते हैं हमारे शिक्षक हमेशा हमें खेल क्रियाओं प्रश्न उत्तर प्रतियोगिताओं मौखिक लिखित परीक्षा वाद वाद विवाद समूह चर्चा आदि दूसरी क्रिया में भाग लेने के लिए भी प्रेरित करते हैं हमारे स्कूल के अध्यापक हमें स्कूल में अनुशासन को बनाए रखने और स्कूल परिसर को साफ और स्वच्छ बनाए रखने के लिए भी प्रेरित करते हैं सचमुच हमारे स्कूल के शिक्षक अच्छे हैं

मेरे स्कूल का पुस्तकालय :-

हमारे स्कूल में एक बहुत ही विशाल पुस्तकालय है इसमें नर्सरी से लेकर 10वीं तक की विभिन्न विषयों की पुस्तकें हैं इस पुस्तकालय में हिंदी के दैनिक समाचार पत्र और कई महत्वपूर्ण माह से कार सवार थे का और वार्षिक पत्रिकाएं भी आती है पुस्तकालय अध्यक्ष बहुत ही परिश्रमी और अच्छे व्यक्ति हैं हमें पुस्तकालय से हमारी जरूरत क प्रत्येक पुस्तक मिल जाती है जिसे घर भी ले जाया जा सकता है पुस्तकालय से पुस्तक को केवल कुछ निश्चित समय के लिए ही घर ले जाने की अनुमति मिलती है ।

विद्यालय के प्रकार :-

बचपन से बड़े होने तक हम अलग-अलग विद्यालयों में पढ़ते हैं विद्यालयों के भी कई प्रकार होते हैं जैसे

  • आंगनवाड़ी :- आंगनवाड़ी में समानता छोटे बच्चों को बैठना और बाकी आधारभूत चीज सिखाते हैं
  • प्राथमिक विद्यालय- प्राथमिक विद्यालय में 1 से 5 तक की पढ़ाई होती है
  • माध्यमिक विद्यालय- इस व्यवस्था में प्रथम से आठवीं तक की शिक्षा दी जाती है कभी-कभी यह कक्षा 6 से 8 तक भी होती है
  • उच्चतर माध्यमिक विद्यालय- 12वीं तक की शिक्षा यहां संपादित होती है

विद्यालय में जब हमारा दाखिला होता है तो उस वक्त हमें नन्हे पौधे रहते हैं हमारा विद्यालय ही हमें चेंज करे बड़ा एक वृक्ष बनाता है और इस दुनिया में रहने योग्य बनाता है हमें अपने जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घड़ियों हम अपने विद्यालय में ही बताते हैं बड़े होने पर हम सबसे अधिक विद्यालय में बिताए लम्हों को ही याद करते हैं

विद्यालय का क्या महत्व है?

विद्यालय में बालक किसी भी विषय का विशिष्ट तथा विस्तृत ज्ञान प्राप्त करता है इसलिए बालक की शिक्षा के लिए विद्यालय घर की अपेक्षा बहुत महत्वपूर्ण है

विद्यालय का वाक्य क्या होगा?

हम प्रतिदिन विद्यालय जाते हैं

स्कूल में स्टूडेंट लाइफ क्या है?

छात्र जीवन का उल्लेख हो सकता है एक छात्र की रोजमर्रा की जिंदगी है छात्र जीवन संगठन एक छात्र नेतृत्व वाला समाज जो स्कूलों में उपयोग करता है

एक अच्छे स्कूल में क्या क्या होना चाहिए?

1. मैनेजमेंट की सोच मैनेजमेंट का वजन ही यह तय करता है कि टीम में कौन टीचर होंगे क्या-क्या एक्टिविटी होंगे और बच्चों का लर्निंग आउटकम क्या होगा 2. जोशीले टीचर्स 3. स्टूडेंट का रिस्पेक्ट 4. लर्निंग आउटकम 5. हैप्पीनेस

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Suneel

नमस्‍कार दोस्‍तों! Hindigrammar.in.net ब्‍लॉग पर आपका हार्दिक स्‍वागत हैं। मैं Suneel Kevat इस ब्‍लॉग का Writer और Founder हूँ. और इस वेबसाइट के माध्‍यम से Hindi Grammar, Essay, Kavi Parichay, Lekhak Parichay, 10 Lines Nibandh and Hindi Biography के बारे में जानकारी शेयर करता हूँ।

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